पाकिस्तान में सुरक्षित JeM नेतृत्व, मसूद अजहर के भाइयों के हाथ ऑपरेशनल कंट्रोल; रऊफ असगर भी जिंदा

 


जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के शीर्ष नेतृत्व को लेकर सामने आई नई रिपोर्टें पाकिस्तान में संगठन के नेतृत्व और उसके सुरक्षित ठिकानों पर फिर सवाल खड़े कर रही हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, संगठन के प्रमुख मसूद अजहर की गैरमौजूदगी के चलते बहावलपुर स्थित JeM ढांचे का ऑपरेशनल कंट्रोल अब उसके भाइयों तल्हा अल-सैफ और मोइनुद्दीन औरंगजेब उर्फ अम्मार अलवी के हाथों में चला गया है।

सूत्रों के मुताबिक, यह बदलाव मसूद अजहर की मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति और सार्वजनिक रूप से सक्रिय न रहने के बीच हुआ है। इससे यह संकेत मिलता है कि संगठन ने अपने शीर्ष नेतृत्व की गैरमौजूदगी के बावजूद कमान और गतिविधियों को जारी रखने के लिए वैकल्पिक नेतृत्व व्यवस्था कायम कर रखी है।

इसी बीच, JeM के वरिष्ठ कमांडर रऊफ असगर को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि रऊफ असगर जिंदा है। इससे पहले उसकी मौत से संबंधित खबरें सामने आई थीं, लेकिन नई जानकारी उन दावों का खंडन करती है।

रिपोर्टों में दावा किया गया है कि मसूद अजहर और रऊफ असगर दोनों पाकिस्तान के सिंध प्रांत के नवाबशाह इलाके में सुरक्षा घेरे के बीच मौजूद हैं। मसूद अजहर की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बावजूद उसका पाकिस्तान में सुरक्षित रहना इस बात को लेकर गंभीर सवाल पैदा करता है कि प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के शीर्ष नेताओं को किस तरह संरक्षण और सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध होते हैं।

मसूद अजहर संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकवादी घोषित किए गए जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक और प्रमुख है। संगठन पर भारत समेत कई देशों में आतंकी हमलों और हिंसक गतिविधियों से जुड़े होने के आरोप रहे हैं। रऊफ असगर भी संगठन के वरिष्ठ नेतृत्व में लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।

ताजा घटनाक्रम का अहम पहलू यह है कि नेतृत्व में बदलाव के बावजूद JeM के संगठनात्मक ढांचे में निरंतरता दिखाई दे रही है। अगर रिपोर्टों में सामने आई जानकारी सही है, तो इससे यह संकेत मिलता है कि संगठन ने शीर्ष नेतृत्व की अनुपस्थिति या स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए पहले से ही वैकल्पिक कमान तैयार कर रखी है।

मसूद अजहर और रऊफ असगर जैसे शीर्ष JeM नेताओं के पाकिस्तान में कथित तौर पर सुरक्षित रहने की खबरें एक बार फिर पाकिस्तान की आतंकवाद-रोधी नीति और प्रतिबंधित संगठनों के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल उठाती हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी प्रतिबंधित आतंकी संगठन की गतिविधियां उसके शीर्ष नेताओं की अनुपस्थिति में भी जारी रहना उसके मजबूत संगठनात्मक नेटवर्क और नेतृत्व संरचना की ओर इशारा करता है। ऐसे में नवाबशाह में कथित सुरक्षा और बहावलपुर में संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़ी रिपोर्टें यह सवाल उठाती हैं कि पाकिस्तान की जमीन पर JeM के नेतृत्व और नेटवर्क पर वास्तविक कार्रवाई किस हद तक हुई है।

हालिया घटनाक्रम इस बात को भी रेखांकित करता है कि आतंकी नेतृत्व के सुरक्षित ठिकाने और संगठनात्मक निरंतरता दक्षिण एशिया की सुरक्षा के लिए अब भी एक गंभीर चुनौती बने हुए हैं।

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