बलूचिस्तान में पाकिस्तान से जुड़े नामों और प्रतीकों हटाने की मुहिम तेज

 

बलूचिस्तान में पाकिस्तान से जुड़े नामों और प्रतीकों को हटाने की मुहिम ने एक बार फिर इस क्षेत्र में बढ़ती अलगाववादी सोच को सामने ला दिया है। 23 अगस्त 2026 को “Republic of Balochistan” के नाम से जारी एक बयान में बलूचिस्तान भर में सड़कों, सरकारी संस्थानों, एयरपोर्ट्स और दूसरे सार्वजनिक स्थानों से पाकिस्तान से जुड़े नाम और प्रतीक हटाने की प्रक्रिया शुरू करने का ऐलान किया गया। बयान में इस कदम को बलूच राष्ट्रीय पहचान, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत की बहाली से जोड़ा गया है।

घोषणा में पाकिस्तान से जुड़े कई नामों को बदलने का प्रस्ताव भी सामने आया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक क्वेटा की Jinnah Road का नाम Nawab Mehrab Khan Road, Fatima Jinnah Road का नाम Dost Mohammad Baloch Road और Iqbal Road का नाम Ghulam Mohammad Baloch Road करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसी तरह British Hospital को Khair Bakhsh Marri Hospital और Sir Sanders Airport को Hammal Baloch Airport नाम देने की बात कही गई है।

बलूचिस्तान में पाकिस्तान के खिलाफ असंतोष कोई नई बात नहीं है। 1948 के बाद से यहां अलग-अलग दौर में बलूच राष्ट्रवादी विद्रोह और राजनीतिक आंदोलन सामने आते रहे हैं। इन आंदोलनों के पीछे राजनीतिक स्वायत्तता, संसाधनों पर अधिकार, आर्थिक विकास, कथित राजनीतिक हाशिये और राज्य दमन जैसे मुद्दे प्रमुख रहे हैं। 2000 के दशक से सशस्त्र विद्रोह ने फिर जोर पकड़ा और Balochistan Liberation Army (BLA) तथा दूसरे बलूच राष्ट्रवादी संगठनों की गतिविधियां सुरक्षा चुनौती बनी हुई हैं।

साल 2026 में बलूचिस्तान की सुरक्षा स्थिति और ज्यादा तनावपूर्ण हुई है। 31 जनवरी 2026 को बलूच अलगाववादी militants ने प्रांत के कई शहरों में समन्वित हमले किए थे। इसके बाद मई 2026 में क्वेटा के पास एक ट्रेन पर हुए घातक हमले की जिम्मेदारी भी BLA ने ली थी। Reuters के अनुसार उस हमले में कम से कम 24 लोगों की मौत और 50 से अधिक लोग घायल हुए थे।

हालिया नाम बदलने की घोषणा इसी व्यापक राजनीतिक और अलगाववादी नैरेटिव का हिस्सा मानी जा रही है। इसका मकसद केवल सड़कों या संस्थानों के नाम बदलना नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्थानों को एक अलग बलूच राष्ट्रीय पहचान से जोड़ना बताया गया है।

हालांकि, “Republic of Balochistan” की स्वतंत्रता संबंधी घोषणाओं को पाकिस्तान सरकार या अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने मान्यता नहीं दी है और पाकिस्तान अभी भी पूरे बलूचिस्तान पर प्रशासनिक नियंत्रण रखता है। इसलिए मौजूदा घटनाक्रम को राजनीतिक और प्रतीकात्मक चुनौती के तौर पर देखना अधिक उचित है, न कि स्थापित स्वतंत्र राज्य की स्थिति के रूप में।

सड़कों, संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों के नामों को बदलने की पहल यह संकेत देती है कि बलूच राष्ट्रवादी नैरेटिव अब केवल राजनीतिक बयानों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि सार्वजनिक जीवन और स्थानीय पहचान पर भी अपना प्रभाव दर्ज कराने की कोशिश कर रहा है। आने वाले दिनों में यह मुहिम पाकिस्तान की प्रशासनिक पकड़, सुरक्षा नीति और बलूच राष्ट्रवादी आंदोलन के बीच टकराव को और तेज कर सकती है।

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