मुकाबले
की शुरुआत
से ही
दोनों टीमों
ने आक्रामक
खेल का
प्रदर्शन किया।
करबी आंगलोंग
ने शुरुआती
मिनटों में
लगातार दबाव
बनाया और
40वें मिनट
में लालेये
(Laleye) के गोल
की बदौलत
1-0 की बढ़त
हासिल कर
ली। पहले
हाफ तक
मेजबान टीम
इसी बढ़त
के साथ
आगे रही,
जबकि FC1 बराबरी
की तलाश
में लगातार
आक्रमण करता
रहा।
दूसरे
हाफ में
श्रीनगर की
टीम बिल्कुल
बदले हुए
अंदाज में
मैदान पर
उतरी। 53वें
मिनट में
शाकिर (Shakir) ने
शानदार गोल
दागकर FC1 को
1-1 की बराबरी
दिलाई और
मुकाबले में
नई जान
फूंक दी।
इस गोल
से टीम
का आत्मविश्वास
बढ़ा और
उसने लगातार
विपक्षी गोल
पर दबाव
बनाए रखा।
बराबरी
के महज
आठ मिनट
बाद 61वें
मिनट में
हयात (Hayat) ने
बेहतरीन मूव
को गोल
में बदलते
हुए FC1 को
2-1 की निर्णायक
बढ़त दिला
दी। इस
गोल के
बाद करबी
आंगलोंग ने
वापसी की
भरपूर कोशिश
की, लेकिन
FC1 की मजबूत
रक्षापंक्ति और
गोलकीपर ने
संयम और
अनुशासन के
साथ सभी
हमलों को
विफल कर
दिया।
मुकाबले
के अंतिम
मिनटों में
करबी आंगलोंग
ने बराबरी
के लिए
लगातार आक्रमण
किए, लेकिन
FC1 ने शानदार
रक्षात्मक खेल
का प्रदर्शन
करते हुए
अपनी बढ़त
कायम रखी।
अंतिम सीटी
बजते ही
श्रीनगर की
टीम ने
डूरंड कप
के अपने
पहले ही
मुकाबले में
ऐतिहासिक जीत
दर्ज कर
ली।
यह
जीत केवल
तीन अंक
हासिल करने
तक सीमित
नहीं है,
बल्कि जम्मू-कश्मीर
में उभरती
फुटबॉल प्रतिभाओं
और प्रदेश
के बदलते
खेल परिवेश
का भी
प्रतीक है।
हाल के
वर्षों में
खेल अवसंरचना,
युवा खिलाड़ियों
के प्रशिक्षण
और राष्ट्रीय
स्तर की
प्रतियोगिताओं में
बढ़ती भागीदारी
का सकारात्मक
प्रभाव अब
मैदान पर
स्पष्ट दिखाई
देने लगा
है। FC1 की
यह सफलता
उसी बदलाव
की एक
मजबूत मिसाल
है।
अब
सभी की
निगाहें FC1 के
अगले मुकाबले
पर होंगी।
यदि टीम
इसी आत्मविश्वास,
अनुशासन और
जुझारू खेल
को बरकरार
रखती है,
तो ग्रुप-एफ
में उसके
अगले दौर
में पहुंचने
की संभावनाएं
और मजबूत
होंगी। डूरंड
कप में
जीत के
साथ किया
गया यह
आगाज़ निश्चित
रूप से
जम्मू-कश्मीर
के फुटबॉल
इतिहास में
एक यादगार
अध्याय के
रूप में
दर्ज होगा।

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