पाक सेना के पूर्व अधिकारियों का खुला विरोध, कहा— ‘यह वह सेना नहीं जिसे हमने जॉइन किया था’


श्रीनगर: पाकिस्तान में सेना की भूमिका को लेकर असंतोष अब केवल राजनीतिक दलों या नागरिक समाज तक सीमित नहीं रह गया है। अब स्वयं पाकिस्तान सेना के पूर्व अधिकारियों के संगठन वेटरन्स ऑफ पाकिस्तान (VOP) ने सैन्य नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए एक कड़ा प्रेस वक्तव्य जारी किया है। 31 जुलाई 2026 को जारी इस बयान का शीर्षक था— “यह वह पाकिस्तान सेना नहीं है जिसे हमने जॉइन किया था और जिसकी सेवा की थी।”

अपने विस्तृत बयान में पूर्व सैनिकों ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में नागरिकों की मौतों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के महीनों में नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग और सैन्य कार्रवाइयों ने सेना की पेशेवर छवि को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में कम से कम 40 नागरिकों की मौत हुई है, जिनमें मुजफ्फराबाद हेलीकॉप्टर दुर्घटना में जान गंवाने वाले 22 लोग भी शामिल हैं। संगठन ने इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि नागरिकों की मौतों के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

वेटरन्स ऑफ पाकिस्तान ने अपने बयान में स्पष्ट शब्दों में कहा कि नागरिकों के विरुद्ध बल प्रयोग तत्काल बंद किया जाए। संगठन ने 7 जून के बाद हुई प्रत्येक मौत की न्यायिक जांच कराने के लिए स्वतंत्र न्यायिक आयोग गठित करने की मांग की है।

पूर्व सैनिकों ने चुनावी पारदर्शिता का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने फॉर्म-45, फॉर्म-46 और फॉर्म-47 को सार्वजनिक करने की मांग करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास बहाल करने के लिए पारदर्शिता आवश्यक है।

बयान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सेना की राजनीतिक भूमिका को लेकर था। वेटरन्स ऑफ पाकिस्तान ने कहा कि सेना को स्थायी रूप से राजनीति से बाहर किया जाना चाहिए और उसे केवल अपने संवैधानिक तथा पेशेवर दायित्वों तक सीमित रहना चाहिए। संगठन के अनुसार, सेना की राजनीतिक दखलअंदाजी ने संस्थानों की विश्वसनीयता को प्रभावित किया है और देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर किया है।

सुरक्षा और दक्षिण एशियाई मामलों के जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान के पूर्व सैन्य अधिकारियों द्वारा इस प्रकार सार्वजनिक रूप से सैन्य नेतृत्व की आलोचना किया जाना एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। सामान्यतः सेना से जुड़े पूर्व अधिकारी सार्वजनिक मंचों पर इस प्रकार के बयान देने से बचते रहे हैं। ऐसे में यह प्रेस विज्ञप्ति संस्थान के भीतर बढ़ती असंतुष्टि और नैतिक संकट की ओर संकेत करती है।

विश्लेषकों का कहना है कि जब किसी देश के पूर्व सैन्य अधिकारी स्वयं नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग, राजनीतिक हस्तक्षेप और जवाबदेही की कमी जैसे मुद्दे उठाने लगें, तो इसे संस्थागत स्तर पर बढ़ते असंतोष के रूप में देखा जा सकता है।

वेटरन्स ऑफ पाकिस्तान की यह प्रेस विज्ञप्ति पाकिस्तान में सेना की भूमिका, नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं के भविष्य पर चल रही बहस को नई दिशा देती है। साथ ही, यह संकेत भी देती है कि सैन्य प्रतिष्ठान की नीतियों को लेकर असहमति अब उसके पूर्व अधिकारियों के बीच भी खुलकर सामने आने लगी है।

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