कश्मीर की खेल प्रतिभा ने एक बार फिर राष्ट्रीय मंच पर अपनी चमक बिखेरी है। श्रीनगर के युवा ताइक्वांडो खिलाड़ी तेजस धर ने बेंगलुरु में आयोजित 55वें नेशनल स्पोर्ट्स मीट 2026-27 में शानदार प्रदर्शन करते हुए बॉयज अंडर-14, अंडर-32 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। तेजस की इस कामयाबी से परिवार, प्रशिक्षकों और खेल जगत में खुशी की लहर है।
तेजस खेलो इंडिया ताइक्वांडो सेंटर, इंडोर हॉल, पोलो ग्राउंड श्रीनगर में प्रशिक्षण लेते हैं। राष्ट्रीय प्रतियोगिता में गोल्ड जीतना उनके लिए केवल एक पदक हासिल करना नहीं बल्कि लंबे समय से जारी मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास का नतीजा है।
ताइक्वांडो में मुकाबला बेहद तेज होता है। खिलाड़ी को कुछ ही सेकंड में सही फैसला लेना पड़ता है। गति, संतुलन, तकनीक और मानसिक मजबूती इस खेल में कामयाबी की बुनियाद मानी जाती है। तेजस ने इसी तैयारी के दम पर राष्ट्रीय स्तर के मुकाबले में अपनी क्षमता साबित की और शीर्ष स्थान हासिल किया।
तेजस की सफलता श्रीनगर के पोलो ग्राउंड स्थित खेलो इंडिया सेंटर की भूमिका को भी सामने लाती है। यहां युवा खिलाड़ियों को नियमित प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के लिए जरूरी मार्गदर्शन मिलता है। ऐसे प्रशिक्षण केंद्र कश्मीर के बच्चों को स्थानीय स्तर से आगे बढ़कर जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचने का अवसर दे रहे हैं।
तेजस का सफर इस बात की मिसाल है कि प्रतिभा को सही अवसर मिले और उसके साथ मेहनत जुड़ जाए तो राष्ट्रीय मंच दूर नहीं रहता। श्रीनगर के प्रशिक्षण हॉल से बेंगलुरु के पोडियम तक पहुंचकर तेजस ने यही संदेश दिया है।
खेल की असली अहमियत सिर्फ मेडल जीतने तक सीमित नहीं रहती। प्रशिक्षण युवा खिलाड़ियों में अनुशासन, धैर्य, एकाग्रता और आत्मविश्वास पैदा करता है। जीत उन्हें आगे बढ़ने का हौसला देती है जबकि हार उन्हें अपनी कमियों को पहचानकर दोबारा मजबूत होकर लौटना सिखाती है।
कश्मीर में पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न खेलों में युवाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। क्रिकेट, फुटबॉल, मार्शल आर्ट्स, एथलेटिक्स और विंटर स्पोर्ट्स समेत कई क्षेत्रों में युवा अपनी पहचान बना रहे हैं। तेजस धर की राष्ट्रीय सफलता इसी बदलते खेल माहौल की एक और प्रेरक तस्वीर है।
तेजस के लिए यह स्वर्ण पदक निश्चित रूप से बड़ी उपलब्धि है लेकिन आगे का रास्ता और चुनौतीपूर्ण होगा। राष्ट्रीय स्तर पर सफलता के बाद अब उन्हें और मजबूत प्रतिद्वंद्वियों का सामना करना होगा। इसके लिए वही अनुशासन, निरंतर अभ्यास और सीखने की ललक जरूरी होगी जिसने उन्हें यहां तक पहुंचाया है।
पोलो ग्राउंड की ट्रेनिंग मैट से बेंगलुरु के राष्ट्रीय पोडियम तक तेजस धर का सफर कश्मीर के उन तमाम युवा खिलाड़ियों के लिए उम्मीद का संदेश है जो बड़े मंच पर अपना नाम बनाने का सपना देखते हैं।
तेजस का गोल्ड सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि यह भरोसा है कि कश्मीर की प्रतिभा को अवसर और मेहनत का साथ मिले तो राष्ट्रीय पोडियम तक पहुंचना पूरी तरह मुमकिन है

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