पाकिस्तान की तरफ से इजरायल को लेकर की गई तल्ख बयानबाजी अब उसके लिए ही सवाल खड़े करती नजर आ रही है। मक्का में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए रक्षा समझौते के बाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री की ओर से इजरायल को “illegitimate” करार देने की धमकी पर इजरायली विश्लेषक इमैनुएल नॉवोन ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है।
नॉवोन ने पाकिस्तान के इस रुख को आक्रामक राजनीतिक बयानबाजी करार देते हुए कहा कि इजरायल को अपनी वैधता साबित करने के लिए पाकिस्तान जैसे किसी मुल्क से प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक इजरायल की पहचान महज आधुनिक राजनीतिक व्यवस्था तक सीमित नहीं, बल्कि उसकी जड़ें हजारों साल पुरानी सभ्यता और इतिहास में मौजूद हैं।
उन्होंने इजरायल को तीन हजार साल पुरानी civilisation और modern success story के तौर पर पेश किया, जबकि पाकिस्तान के अस्तित्व को 20वीं सदी में ब्रिटिश औपनिवेशिक दौर के दौरान बनी राजनीतिक व्यवस्था से जोड़ते हुए उस पर सवाल उठाए।
नॉवोन की टिप्पणी का सबसे तीखा हिस्सा पाकिस्तान को लेकर था। उन्होंने पाकिस्तान को एक “failed state” के रूप में वर्णित करते हुए कहा कि इजरायल को उसकी वैधता की कोई जरूरत नहीं है। यह बयान ऐसे वक्त आया है जब पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इजरायल के खिलाफ अपनी पुरानी राजनीतिक स्थिति को और मुखर करने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है।
कश्मीर और दक्षिण एशिया के संदर्भ में देखें तो पाकिस्तान की विदेश नीति में इजरायल का मुद्दा लंबे समय से एक संवेदनशील विषय रहा है। लेकिन मौजूदा घटनाक्रम यह सवाल जरूर उठाता है कि क्या इस तरह की तीखी बयानबाजी पाकिस्तान की वास्तविक कूटनीतिक स्थिति को मजबूत करती है या फिर उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि को और नुकसान पहुंचाती है।
पाकिस्तान अक्सर खुद को मुस्लिम दुनिया की आवाज के तौर पर पेश करने की कोशिश करता रहा है। मगर दूसरी तरफ उसकी आर्थिक चुनौतियां, राजनीतिक अस्थिरता और सुरक्षा से जुड़े संकट उसकी इस छवि को लगातार चुनौती देते रहे हैं। ऐसे में इजरायल के खिलाफ कठोर बयान देना घरेलू राजनीति के लिए भले ही इस्तेमाल हो, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में इसका असर अलग हो सकता है।
नॉवोन की टिप्पणी इसी विरोधाभास को सामने लाती है। उनका संदेश साफ है कि किसी दूसरे देश की वैधता पर सवाल उठाने से पहले अपने राजनीतिक और संस्थागत हालात को देखना भी जरूरी है।
हालांकि, पाकिस्तान के “औपनिवेशिक आविष्कार” और “failed state” जैसे आकलन नॉवोन की राजनीतिक टिप्पणी हैं, कोई सर्वमान्य ऐतिहासिक निष्कर्ष नहीं। फिर भी उनका बयान पाकिस्तान की बढ़ती आक्रामक बयानबाजी और उसके सामने मौजूद कूटनीतिक चुनौतियों पर बहस को जरूर तेज करता है।

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