कश्मीर की वादियों में सिर्फ खूबसूरती ही नहीं, बल्कि हुनर भी पलता है। बारामूला के ओल्ड टाउन से निकलकर युवा वुशू सांडा खिलाड़ी मुशर्रफ कयूम ने इस बात को बार-बार साबित किया है। हाल ही में हैदराबाद में आयोजित All India Police Games Judo Cluster में अंडर-52 किलोग्राम वुशू सांडा वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर उन्होंने कश्मीर के खेल जगत को एक और बड़ी कामयाबी दी। उनकी इस उपलब्धि पर बारामूला के खेल समुदाय ने भी उन्हें बधाई दी।
मुशर्रफ की कहानी हालांकि इस एक गोल्ड मेडल से शुरू नहीं होती। ओल्ड टाउन बारामूला में बचपन से combat sports की ओर उनका रुझान रहा। उन्होंने महज पांच साल की उम्र में combat sports की training शुरू कर दी थी। इसके बाद करीब 13 वर्षों तक लगातार मेहनत करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बनाई।
उनके नाम कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पदक दर्ज हैं। 2024 में उन्हें 19 वर्षीय खिलाड़ी के रूप में रिपोर्ट किया गया था और उस समय तक वे विभिन्न martial arts competitions में 37 gold medals जीत चुके थे। वह Taekwondo में black belt भी रखते हैं।
मुशर्रफ ने अपने सफर में कई कठिनाइयों का सामना किया। Chinar Yuva Centre में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने सीमित संसाधनों और professional sports की कठिन चुनौतियों का भी जिक्र किया। लेकिन उनकी मेहनत और लगातार training ने उन्हें आगे बढ़ाया। उनकी training में Ishfaq Wani और Dronacharya Awardee DSP Kuldeep Handoo जैसे mentors की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
परिवार के support को भी मुशर्रफ अपनी कामयाबी का अहम हिस्सा मानते हैं। उन्होंने अपनी मां से मिलने वाले support और motivation को अपनी सफलता के कारणों में शामिल किया था। उपलब्ध जानकारी में उनकी मां का नाम नहीं दिया गया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मुशर्रफ ने मजबूत पहचान बनाई है। अक्टूबर 2024 में उन्होंने जॉर्जिया में आयोजित Eurasian Professional Sanda League का खिताब जीता और तीन राउंड के मुकाबले में आर्मेनिया के एक former champion को हराया। इससे पहले Batumi International Wushu Championship में भी उन्होंने gold medal जीता था।
उनकी उपलब्धियों को प्रशासनिक स्तर पर भी पहचान मिली। तत्कालीन Deputy Commissioner Baramulla Minga Sherpa ने उनकी कामयाबी को जिले और युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया, जबकि Lieutenant Governor Manoj Sinha ने भी अक्टूबर 2024 में राजभवन में उनसे मुलाकात कर Eurasian Sanda League की जीत पर बधाई दी।
मुशर्रफ कयूम की कहानी आज कश्मीर के उन नौजवानों के लिए मिसाल बन रही है जो खेलों को सिर्फ शौक नहीं, बल्कि career और पहचान का जरिया बनाना चाहते हैं। ओल्ड टाउन बारामूला से शुरू हुआ उनका सफर अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मार्शल आर्ट्स मंच तक पहुंच चुका है। उनकी नई जीत यही संदेश देती है कि सही मेहनत, discipline, mentors का मार्गदर्शन और परिवार का support मिले तो कश्मीर का युवा किसी भी बड़े मंच पर अपनी जगह बना सकता है।
कश्मीर की वादियों में सिर्फ खूबसूरती ही नहीं, बल्कि हुनर भी पलता है। बारामूला के ओल्ड टाउन से निकलकर युवा वुशू सांडा खिलाड़ी मुशर्रफ कयूम ने इस बात को बार-बार साबित किया है। हाल ही में हैदराबाद में आयोजित All India Police Games Judo Cluster में अंडर-52 किलोग्राम वुशू सांडा वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर उन्होंने कश्मीर के खेल जगत को एक और बड़ी कामयाबी दी। उनकी इस उपलब्धि पर बारामूला के खेल समुदाय ने भी उन्हें बधाई दी।
मुशर्रफ की कहानी हालांकि इस एक गोल्ड मेडल से शुरू नहीं होती। ओल्ड टाउन बारामूला में बचपन से combat sports की ओर उनका रुझान रहा। उन्होंने महज पांच साल की उम्र में combat sports की training शुरू कर दी थी। इसके बाद करीब 13 वर्षों तक लगातार मेहनत करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बनाई।
उनके नाम कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पदक दर्ज हैं। 2024 में उन्हें 19 वर्षीय खिलाड़ी के रूप में रिपोर्ट किया गया था और उस समय तक वे विभिन्न martial arts competitions में 37 gold medals जीत चुके थे। वह Taekwondo में black belt भी रखते हैं।
मुशर्रफ ने अपने सफर में कई कठिनाइयों का सामना किया। Chinar Yuva Centre में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने सीमित संसाधनों और professional sports की कठिन चुनौतियों का भी जिक्र किया। लेकिन उनकी मेहनत और लगातार training ने उन्हें आगे बढ़ाया। उनकी training में Ishfaq Wani और Dronacharya Awardee DSP Kuldeep Handoo जैसे mentors की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
परिवार के support को भी मुशर्रफ अपनी कामयाबी का अहम हिस्सा मानते हैं। उन्होंने अपनी मां से मिलने वाले support और motivation को अपनी सफलता के कारणों में शामिल किया था। उपलब्ध जानकारी में उनकी मां का नाम नहीं दिया गया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मुशर्रफ ने मजबूत पहचान बनाई है। अक्टूबर 2024 में उन्होंने जॉर्जिया में आयोजित Eurasian Professional Sanda League का खिताब जीता और तीन राउंड के मुकाबले में आर्मेनिया के एक former champion को हराया। इससे पहले Batumi International Wushu Championship में भी उन्होंने gold medal जीता था।
उनकी उपलब्धियों को प्रशासनिक स्तर पर भी पहचान मिली। तत्कालीन Deputy Commissioner Baramulla Minga Sherpa ने उनकी कामयाबी को जिले और युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया, जबकि Lieutenant Governor Manoj Sinha ने भी अक्टूबर 2024 में राजभवन में उनसे मुलाकात कर Eurasian Sanda League की जीत पर बधाई दी।
मुशर्रफ कयूम की कहानी आज कश्मीर के उन नौजवानों के लिए मिसाल बन रही है जो खेलों को सिर्फ शौक नहीं, बल्कि career और पहचान का जरिया बनाना चाहते हैं। ओल्ड टाउन बारामूला से शुरू हुआ उनका सफर अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मार्शल आर्ट्स मंच तक पहुंच चुका है। उनकी नई जीत यही संदेश देती है कि सही मेहनत, discipline, mentors का मार्गदर्शन और परिवार का support मिले तो कश्मीर का युवा किसी भी बड़े मंच पर अपनी जगह बना सकता है।

0 टिप्पणियाँ