पाकिस्तानी भिखारियों को अब नहीं मिलेगी भीख! सऊदी अरब ने 5,033 को किया डिपोर्ट

 


पाकिस्तान से बाहर जाने वाले जायरीनों के बीच भीख मांगने और स्थानीय कानूनों का उल्लंघन करने के मामलों को लेकर पाकिस्तानी हुकूमत ने एक बार फिर एडवाइजरी जारी की है। ताजा हिदायत में पाकिस्तानी जायरीनों से कहा गया है कि वे सऊदी अरब में भीख मांगने या ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल न हों, जो वहां के कानूनों और नियमों की खिलाफवर्जी करती हो। यह एडवाइजरी ऐसे समय में सामने आई है जब सऊदी अरब से पाकिस्तानी नागरिकों द्वारा भीख मांगने के मामलों में बड़ी संख्या में डिपोर्ट किए जाने की जानकारी सामने आई है।

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2024 से मई 2025 के बीच सऊदी अरब ने 5,033 पाकिस्तानी भिखारियों को डिपोर्ट किया। यह आंकड़ा केवल सऊदी अरब तक सीमित नहीं है। खाड़ी सहयोग परिषद यानी GCC के दूसरे मुल्कों से भी बड़ी तादाद में पाकिस्तानी नागरिकों को भीख मांगने या उससे जुड़ी गतिविधियों के आरोप में वापस भेजे जाने की खबरें सामने आती रही हैं।

पाकिस्तान सरकार की नई एडवाइजरी में जायरीनों को विशेष तौर पर आगाह किया गया है कि वे उमरा और धार्मिक यात्राओं के दौरान भीख मांगने से पूरी तरह परहेज करें। साथ ही, उन्हें सऊदी कानूनों की पाबंदी करने और ऐसी किसी भी गतिविधि से दूर रहने की हिदायत दी गई है, जिससे पाकिस्तान और उसके नागरिकों की छवि को नुकसान पहुंचे।

मामले का एक अहम पहलू यह है कि सऊदी अरब में भीख मांगना केवल सामाजिक तौर पर नापसंद किया जाने वाला व्यवहार नहीं, बल्कि वहां के कड़े कानूनों के दायरे में आने वाला मामला है। इसलिए विदेशी नागरिकों द्वारा ऐसी गतिविधियों में शामिल होने पर हिरासत, कानूनी कार्रवाई और डिपोर्टेशन जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

पाकिस्तान के लिए यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि बड़ी संख्या में लोगों का विदेशों में भीख मांगते हुए पकड़ा जाना देश की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर सवाल खड़े करता है। पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक संकट, बेरोजगारी, महंगाई और सीमित रोजगार अवसरों जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे हालात में कुछ नागरिक बेहतर कमाई की उम्मीद में विदेश जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में भीख मांगने के नेटवर्क से जुड़ जाते हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, विदेशों में पाकिस्तानी नागरिकों के इस तरह पकड़े जाने और डिपोर्ट होने से केवल संबंधित व्यक्तियों को नुकसान नहीं होता, बल्कि आम पाकिस्तानी कामगारों और जायरीनों की छवि पर भी असर पड़ता है। इससे उन लाखों पाकिस्तानी नागरिकों के लिए भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं जो कानूनी तरीके से रोजगार और कारोबार के लिए विदेश जाते हैं।

सऊदी अरब की कार्रवाई और पाकिस्तान की नई एडवाइजरी इस बात को रेखांकित करती है कि विदेशों में नागरिकों के आचरण का सीधा असर किसी भी मुल्क की अंतरराष्ट्रीय साख पर पड़ता है। 5,033 डिपोर्टेशन का आंकड़ा इस समस्या की गंभीरता को उजागर करता है और पाकिस्तान के सामने अब केवल एडवाइजरी जारी करने के बजाय इसके सामाजिक और आर्थिक कारणों से निपटने की चुनौती भी मौजूद है।

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