पाकिस्तान में प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के बीच कथित संपर्क और सहयोग को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल सामने आए हैं। हाल में सामने आई तस्वीरों और रिपोर्टों में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के वरिष्ठ कमांडर राणा मोहम्मद अशफाक और ISKP से जुड़े शफीक मेंगल के बीच कथित मुलाकात का उल्लेख किया गया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब पाकिस्तान और उसके सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय आतंकी नेटवर्क के आपसी संबंधों पर सुरक्षा विशेषज्ञ लगातार चिंता जताते रहे हैं।
बताया गया है कि सामने आई तस्वीर में शफीक मेंगल और राणा मोहम्मद अशफाक साथ नजर आ रहे हैं। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, यह मुलाकात बलूचिस्तान में हुई और इसे LeT तथा ISKP के बीच संभावित तालमेल के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, तस्वीर की परिस्थितियों, मुलाकात के उद्देश्य और किसी संयुक्त ऑपरेशन की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
इससे पहले BLA प्रवक्ता जीयंद बलोच ने शफीक मेंगल के संबंधों को लेकर आरोप लगाए थे और उनका नाम LeT, ISIS तथा लश्कर-ए-झांगवी जैसे संगठनों से जोड़ने का दावा किया था। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू LeT और ISKP के कथित संयुक्त प्रशिक्षण ढांचे से जुड़ा है। कुछ भारतीय रिपोर्टों ने दावा किया है कि दोनों संगठनों के बीच प्रशिक्षण, लॉजिस्टिक सहायता और कैडर स्तर पर संपर्क विकसित हो रहा है। यदि इन दावों की पुष्टि होती है, तो यह पाकिस्तान के भीतर अलग-अलग आतंकी संगठनों के बीच संभावित सहयोग की गंभीर तस्वीर पेश करेगा।
लश्कर-ए-तैयबा लंबे समय से जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों से जुड़ा संगठन रहा है, जबकि ISKP अफगानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र में सक्रिय एक अलग आतंकी संगठन है। दोनों के बीच कथित संपर्क इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वैचारिक रूप से अलग संगठनों का संसाधन, प्रशिक्षण या नेटवर्क साझा करना क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए नई चुनौती पैदा कर सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तानी सैन्य या खुफिया प्रतिष्ठान की कथित भूमिका सबसे गंभीर आरोपों में शामिल है। कुछ रिपोर्टें ISI के संरक्षण या समन्वय का दावा करती हैं, लेकिन इन आरोपों को स्वतंत्र और विश्वसनीय प्रमाणों से स्थापित करना जरूरी है। इसलिए इन्हें तथ्य के बजाय आरोप और रिपोर्ट किए गए दावे के रूप में देखना अधिक उचित होगा।
फिर भी, LeT और ISKP से जुड़े लोगों की कथित मुलाकात ने पाकिस्तान में प्रतिबंधित आतंकी संगठनों की गतिविधियों और उनके संभावित आपसी नेटवर्क पर नए सवाल जरूर खड़े किए हैं। अगर आगे स्वतंत्र जांच में प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता या ऑपरेशनल सहयोग की पुष्टि होती है, तो इसका असर केवल पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कश्मीर और पूरे दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।

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