एशियन कबड्डी लीग (AKL) एक नई बैनुल-अक़वामी फ्रेंचाइज़ी आधारित कबड्डी लीग है, जिसका मक़सद एशिया के बेहतरीन कबड्डी खिलाड़ियों को एक ही मंच पर लाना है। कबड्डी बरसों से हिंदुस्तान, ईरान, बांग्लादेश, नेपाल और पाकिस्तान जैसे मुल्कों में बेहद मक़बूल खेल रही है। अब यह लीग इस खेल को और ज़्यादा पेशेवर पहचान देने की कोशिश कर रही है। इसके ज़रिए एशिया भर की आला दर्जे की खिलाड़ियों को अपनी सलाहियत दिखाने का मौक़ा मिलेगा, ख़वातीन की शिरकत बढ़ेगी, मीडिया की तवज्जो हासिल होगी और नई नस्ल को कबड्डी की तरफ़ राग़िब किया जाएगा। दूसरी पेशेवर लीगों की तरह AKL भी खिलाड़ियों को दुनिया के उम्दा खिलाड़ियों के साथ खेलने, तजुर्बा हासिल करने और अपनी फ़नी (तकनीकी) व दिफ़ाई सलाहियतों को और निखारने का सुनहरा मौक़ा फ़राहम करेगी।
एशियन कबड्डी लीग का आग़ाज़ कबड्डी को आलमी सतह पर नई पहचान दिलाने में अहम किरदार अदा करेगा। ऐसी पेशेवर लीगें न सिर्फ़ मुक़ाबलों का मयार बुलंद करती हैं, बल्कि खिलाड़ियों के लिए स्पॉन्सरशिप, बेहतर कोचिंग, स्पोर्ट्स साइंस, रोज़गार और बैनुल-अक़वामी शोहरत के रास्ते भी खोलती हैं। ख़ास तौर पर ख़वातीन खिलाड़ियों के लिए यह लीग एक मज़बूत मंच साबित होगी, जो समाज में मौजूद पुरानी सोच को बदलते हुए यह पैग़ाम देगी कि रिवायती खेल भी कामयाब पेशेवर करियर बन सकते हैं। यही वजह है कि यह लीग सिर्फ़ एक खेली मुकाबला नहीं, बल्कि कबड्डी की लगातार तरक़्क़ी और उसके आलमी सफ़र का नया मरहला है।
शारिया मंज़ूर की यह तारीखी कामयाबी बरसों की लगातार मेहनत, मुस्तक़िल रियाज़त और बेपनाह लगन का नतीजा है। पुलवामा से ताल्लुक़ रखने वाली शारिया ने मुक़ाबलों की हर मंज़िल को मेहनत और बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर तय किया है। उन्होंने हर दौर में अपनी सलाहियतों को बेहतर बनाया और कामयाबी के सफ़र को जारी रखा। उनका यह सफ़र जम्मू-कश्मीर के उन तमाम नौजवान खिलाड़ियों के लिए एक मिसाल है, जो एक दिन अपने वतन और मुल्क की नुमाइंदगी करने का ख़्वाब देखते हैं। शारिया ने साबित कर दिया कि अगर हुनर के साथ सब्र, मेहनत और सही रहनुमाई हो तो मुश्किल हालात भी कामयाबी की राह नहीं रोक सकते।
शारिया की इस कामयाबी के पीछे उनके कोच अरशिद राथर का भी बेहद अहम किरदार रहा है। उनकी रहनुमाई, फ़नी महारत और लगातार हौसला-अफ़ज़ाई ने शारिया को एक आला दर्जे की कबड्डी खिलाड़ी बनाने में अहम हिस्सा अदा किया। हर कामयाब खिलाड़ी के पीछे एक समर्पित कोच होता है, जो सिर्फ़ खेल नहीं सिखाता बल्कि अनुशासन, ख़ुद-एतमादी, टीम वर्क और मुश्किल हालात में मज़बूती से डटे रहने का हौसला भी पैदा करता है। शारिया की कामयाबी इस मज़बूत खिलाड़ी-कोच रिश्ते की बेहतरीन मिसाल है।
जम्मू-कश्मीर एमेच्योर कबड्डी एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी डॉ. कुलदीप कुमार गुप्ता ने शारिया को मुबारकबाद पेश करते हुए कहा कि उनका इंतिख़ाब बरसों की मेहनत, सब्र और मुकम्मल तैयारी का सिला है। उन्होंने कोच अरशिद राथर की भी दिल खोलकर तारीफ़ की और कहा कि उन्होंने शारिया के हुनर को तराशने और उन्हें बैनुल-अक़वामी सतह के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाई है। एसोसिएशन की यह सराहना इस बात का इज़हार है कि खेल बिरादरी को शारिया की सलाहियतों पर पूरा भरोसा है और उन्हें यक़ीन है कि वह एशिया के सबसे बड़े कबड्डी मंचों में शानदार प्रदर्शन करेंगी।
डॉ. गुप्ता ने जम्मू-कश्मीर स्पोर्ट्स काउंसिल की कोशिशों को भी सराहा। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया सेंटर और PMDP सेंटर ने जम्मू-कश्मीर के नौजवान खिलाड़ियों को बेहतर कोचिंग, आधुनिक सहूलियतें और मुनज़्ज़म (संगठित) प्रशिक्षण मुहैया कराया है। इन मराकिज़ (केंद्रों) ने ज़मीनी सतह से हुनरमंद खिलाड़ियों की पहचान कर उन्हें ऊँचे मुक़ाबलों के लिए तैयार करने में अहम किरदार निभाया है। उन्होंने स्पोर्ट्स काउंसिल के उस फ़ैसले का भी इस्तक़बाल किया, जिसके तहत जम्मू-कश्मीर में 10 नए कबड्डी सेंटर मंज़ूर किए गए हैं। उनके मुताबिक़ यह क़दम जड़ों से खेल को मज़बूत करेगा और ज़्यादा से ज़्यादा लड़के-लड़कियों को पेशेवर कबड्डी की तरफ़ आने का मौक़ा देगा।
आज जम्मू-कश्मीर में कबड्डी तेज़ी से तरक़्क़ी कर रही है। जो खेल कभी सिर्फ़ स्थानीय मुक़ाबलों तक महदूद था, वही आज ऐसे खिलाड़ी तैयार कर रहा है जो क़ौमी और बैनुल-अक़वामी सतह पर अपनी पहचान बना रहे हैं। साल 2026 में जम्मू-कश्मीर के दो खिलाड़ियों का प्रो कबड्डी लीग में पहुँचना पहले ही इस बढ़ती कामयाबी का सबूत बन चुका है। अब शारिया मंज़ूर का एशियन कबड्डी लीग के लिए इंतिख़ाब इस सफ़र को और मज़बूत बनाता है और यह दिखाता है कि जम्मू-कश्मीर अब हिंदुस्तानी कबड्डी का एक अहम मरकज़ बनता जा रहा है।
शारिया की यह कामयाबी सिर्फ़ खेल तक महदूद नहीं है, बल्कि यह ख़वातीन इख़्तियारसाज़ी (महिला सशक्तिकरण) का भी एक मज़बूत पैग़ाम देती है। उनकी सफलता वादी की हज़ारों बेटियों को यह यक़ीन दिलाएगी कि अगर घरवालों का साथ, बेहतर कोचिंग, अच्छी बुनियादी सहूलियतें और अपनी मेहनत शामिल हो, तो जम्मू-कश्मीर का हर नौजवान एशिया के बेहतरीन खिलाड़ियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खेल सकता है। ऐसी कामयाब बेटियाँ आने वाली नस्लों के लिए रोल मॉडल बनती हैं और समाज को ज़्यादा सेहतमंद, ख़ुद-एतमाद और मज़बूत बनाने में अहम किरदार निभाती हैं।
अब जब शारिया मंज़ूर एशियन कबड्डी लीग के इस तारीखी सफ़र के लिए तैयार हैं, तो उनके साथ उनके अहल-ए-ख़ाना, कोच, चाहने वाले, पूरा जम्मू-कश्मीर और मुल्क की दुआएँ और उम्मीदें भी हैं। उनका यह इंतिख़ाब जम्मू-कश्मीर में खेलों की तरक़्क़ी के सुनहरे सफ़र का एक और अहम बाब है। पूरी खेल बिरादरी को यक़ीन है कि शारिया हिंदुस्तान की शानदार नुमाइंदगी करेंगी और वादी के नौजवान खिलाड़ियों को बड़े ख़्वाब देखने और उन्हें हक़ीक़त में बदलने का नया हौसला देंगी।

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