लेक्चर के दौरान मेडिकल माहिरीन और ज़िम्मेदार अफ़सरान ने नौजवानों को रोज़मर्रा की ज़िंदगी में बेहतर सेहत बनाए रखने, साफ़-सफ़ाई, मुतवाज़िन ग़िज़ा, जिस्मानी वरज़िश और वक़्त पर इलाज की अहमियत से आगाह किया। साथ ही यह भी बताया गया कि अच्छी सेहत ही एक रोशन मुस्तक़बिल की बुनियाद है और समाज की तरक़्क़ी का अहम ज़रिया भी।
मुक़र्रिरीन ने कहा कि नौजवान किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताक़त होते हैं। अगर उन्हें सही रहनुमाई, बेहतर तालीम और सेहत से जुड़ी मालूमात वक़्त पर फ़राहम की जाएँ तो वे अपने ख़ानदान और पूरे समाज के लिए मिसाली किरदार अदा कर सकते हैं। उन्होंने मौजूद नौजवानों से अपील की कि वे सेहत के बारे में जागरूक रहें और अपनी जानकारी दूसरों तक भी पहुँचाएँ।
प्रोग्राम के दौरान नौजवानों ने भी खुलकर सवालात किए, जिनका मेडिकल माहिरीन ने तफ़सील से जवाब दिया। इस इज्तिमा ने नौजवानों को न सिर्फ़ सेहत के बारे में नई मालूमात दीं बल्कि उन्हें अपनी ज़िम्मेदारियों का एहसास भी दिलाया। शिरकत करने वाले कई नौजवानों ने कहा कि ऐसे प्रोग्राम उनकी शख़्सियत-साज़ी और बेहतर ज़िंदगी की तरफ़ एक अहम क़दम साबित होते हैं।
अवाम का कहना है कि भारतीय फ़ौज सिर्फ़ सरहदों की हिफ़ाज़त तक महदूद नहीं है, बल्कि कश्मीर के नौजवानों की तालीम, सेहत और बेहतरी के लिए भी लगातार काम कर रही है। चिनार यूथ एम्पावरमेंट सेंटर में वक़्त-ब-वक़्त आयोजित होने वाले ऐसे प्रोग्राम नौजवानों को नई सोच, नई उम्मीद और रचनात्मक रास्ता फ़राहम कर रहे हैं।
मुताल्लिक़ ज़राए का कहना है कि भारतीय फ़ौज की ऐसी फ़लाही पहलें कश्मीर में अमन, भरोसे और तरक़्क़ी की फ़ज़ा को मज़बूत कर रही हैं। तालीम, सेहत और नौजवानों के इख़्तियार को मज़बूत बनाने पर दिया जा रहा ज़ोर यह पैग़ाम देता है कि एक खुशहाल और पुरअमन कश्मीर की तामीर में हर तबक़े की बेहतरी को अहमियत दी जा रही है।
नेशनल डॉक्टर्स डे के मौक़े पर आयोजित यह सेहत-बेदारी लेक्चर इस बात की मिसाल है कि भारतीय फ़ौज कश्मीर में इंसानी ख़िदमत, नौजवानों की रहनुमाई और समाजी तरक़्क़ी के लिए अपनी ज़िम्मेदारियों को पूरी संजीदगी से निभा रही है। ऐसी कोशिशें नौजवान नस्ल को बेहतर मुस्तक़बिल की तरफ़ राह दिखाने के साथ-साथ पूरे इलाक़े में अमन, यकजहती और तरक़्क़ी के पैग़ाम को भी मज़बूती से आगे बढ़ा रही हैं। यही वजह है कि आज भारतीय फ़ौज को कश्मीर में महज़ एक सुरक्षा बल नहीं, बल्कि अवाम की ख़िदमत और उम्मीद की एक मज़बूत कड़ी के तौर पर भी देखा जा रहा है।


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