पाकिस्तान के क़ब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर के रावलाकोट इलाक़े में बड़े पैमाने पर एहतिजाज देखने को मिला, जहाँ हज़ारों मर्द, औरतें और नौजवान सड़कों पर उतर आए। मुज़ाहिरीन ने पाकिस्तान हुकूमत के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाज़ी की और इल्ज़ाम लगाया कि इस इलाक़े के लोगों के साथ लगातार नाइंसाफ़ी की जा रही है। एहतिजाज के दौरान कई तख़्तियाँ और बैनर भी नज़र आए, जिनमें साफ़ अल्फ़ाज़ में कहा गया कि पीओजेके पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है और अवाम को अपने मुस्तक़बिल का फ़ैसला ख़ुद करने का हक़ मिलना चाहिए।
मुज़ाहिरीन का कहना था कि पाकिस्तान की तरफ़ से लगाए गए बंदिशों और नाकाबंदी जैसी सूरत-ए-हाल ने आम ज़िंदगी को बेहद मुश्किल बना दिया है। रोज़मर्रा की ज़रूरी अशिया, तिजारत और आवाजाही पर पड़ रहे असर से लोगों में गहरा ग़ुस्सा पाया जा रहा है। एहतिजाज में शामिल लोगों ने इल्ज़ाम लगाया कि इस पूरे इलाक़े को तरक़्क़ी से महरूम रखा गया है और अवाम की आवाज़ को लगातार दबाने की कोशिश की जाती रही है।
एहतिजाज की क़ियादत कर रहे कई मुक़ामी रहनुमाओं ने कहा कि अगर मौजूदा हालात में कोई तब्दीली नहीं लाई गई और नाकाबंदी का सिलसिला जारी रहा, तो पीओजेके के लोग अपने सियासी और मआशी मुस्तक़बिल के लिए दूसरे रास्तों पर ग़ौर करने के लिए मजबूर होंगे। कुछ रहनुमाओं ने यह भी कहा कि अगर अवाम की जायज़ मांगों को लगातार नज़रअंदाज़ किया गया, तो इलाक़े में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ नाराज़गी और ज़्यादा बढ़ सकती है।
सियासी माहिरीन का मानना है कि इस तरह के बड़े एहतिजाज पाकिस्तान के क़ब्ज़े वाले इलाक़े में बढ़ते असंतोष की तरफ़ इशारा करते हैं। उनका कहना है कि जब किसी इलाक़े की बड़ी तादाद में अवाम खुलकर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर करने लगे और हुकूमत के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद करे, तो यह हुकूमत के लिए गंभीर पैग़ाम माना जाता है। लगातार सामने आ रही ऐसी ख़बरें यह दिखाती हैं कि मुक़ामी लोगों के बीच बेहतर हुकूमत, तरक़्क़ी, रोज़गार और बुनियादी सहूलियतों की मांग पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत हो चुकी है।
मुज़ाहिरीन ने यह भी कहा कि उनकी लड़ाई आम लोगों के हक़, इज़्ज़त और बेहतर ज़िंदगी के लिए है। उनका कहना था कि इलाक़े के नौजवान रोज़गार, तालीम और बेहतर सहूलियतों की कमी से परेशान हैं, जबकि हुकूमत उनकी परेशानियों का हल निकालने में नाकाम नज़र आ रही है। एहतिजाज के दौरान कई मुक़ामी लोगों ने अपने ग़ुस्से और मायूसी का इज़हार करते हुए कहा कि अब उनकी आवाज़ को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
रावलाकोट में हुआ यह बड़ा एहतिजाज एक बार फिर इस बात की तरफ़ तवज्जो दिलाता है कि पीओजेके में अवाम के बीच बेचैनी और नाराज़गी का एहसास लगातार बढ़ रहा है। बदलते हालात ने पाकिस्तान के लिए नई चुनौतियाँ पैदा कर दी हैं और यह सूरत-ए-हाल आने वाले दिनों में और अहम हो सकती है। फ़िलहाल पूरे इलाक़े पर सबकी नज़र बनी हुई है कि हुकूमत इस बढ़ते एहतिजाज और अवामी नाराज़गी से किस तरह निपटती है और आगे क्या क़दम उठाती है।


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