श्रीनगर: उत्तर कश्मीर के दूरदराज़ और सरहदी इलाक़ों में डिजिटल तरक़्क़ी की एक और अहम मिसाल क़ायम हुई है। रिलायंस जियो ने भारतीय सेना के तआवुन से कुपवाड़ा ज़िले की दुर्गम बांगुस घाटी और सीमारी गाँव में स्थायी हाई-स्पीड टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर और 5G सेवाओं का कामयाब आग़ाज़ कर दिया है। इस क़दम से उन इलाक़ों को पहली बार तेज़-रफ़्तार डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा गया है, जहाँ वर्षों तक मुश्किल भौगोलिक हालात की वजह से आधुनिक संचार सुविधाएँ पहुँचाना आसान नहीं था।
करीब 10,000 फ़ीट की बुलंदी पर वाक़े बांगुस घाटी में जियो ने अपने मूलधारी टेलीकॉम साइट को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। सख़्त मौसम, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियाँ और सीमित संसाधनों के बावजूद इस स्थायी टेलीकॉम ढाँचे का तैयार होना उत्तर कश्मीर के लिए एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।
इसी सिलसिले में भारतीय सेना के तआवुन से कर्नाह घाटी के सीमारी गाँव में भी हाई-स्पीड 5G सेवा शुरू की गई है। "भारत का पोलिंग बूथ नंबर-1" के नाम से मशहूर यह सरहदी गाँव श्रीनगर से लगभग 170 किलोमीटर दूर स्थित है और देश के सबसे दुर्गम सीमा क्षेत्रों में शुमार किया जाता है। अब इस गाँव के बाशिंदों को भी आधुनिक डिजिटल कनेक्टिविटी की सहूलियत हासिल हो गई है।
बांगुस और सीमारी के डिजिटल नेटवर्क से जुड़ने के बाद इन इलाक़ों में रहने वाले लोगों के लिए संचार व्यवस्था पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत होगी। लंबे अरसे तक कठिन भौगोलिक हालात और दुर्गम रास्तों के कारण इन क्षेत्रों में आधुनिक दूरसंचार सेवाओं की कमी महसूस की जाती थी। अब नई पीढ़ी के 5G नेटवर्क से यह दूरी काफ़ी हद तक कम हो जाएगी।
इस डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर का सबसे बड़ा फ़ायदा स्थानीय आबादी, पर्यटकों, नागरिक प्रशासन और सीमा पर तैनात भारतीय फ़ौज के जवानों को मिलेगा। तेज़ इंटरनेट की बदौलत ई-गवर्नेंस, डिजिटल बैंकिंग, ऑनलाइन तालीम, टेलीमेडिसिन और बेहतर संचार सेवाओं तक आसान पहुँच मुमकिन होगी। ख़ास तौर पर सर्दियों के मौसम में, जब बर्फ़बारी के कारण आवाजाही मुश्किल हो जाती है, तब यह डिजिटल नेटवर्क लोगों के लिए बेहद कारगर साबित होगा।
बांगुस घाटी अपनी ख़ूबसूरत वादियों और इको-टूरिज़्म की अपार संभावनाओं के लिए जानी जाती है। बेहतर इंटरनेट सुविधा मिलने से स्थानीय होम-स्टे, पर्यटन कारोबार और छोटे व्यापारियों को ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए अपने कारोबार को बढ़ावा देने का मौक़ा मिलेगा। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई रफ़्तार मिलने और रोज़गार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
जियो ने बताया कि इस चुनौतीपूर्ण परियोजना को सफल बनाने में उसकी इंजीनियरिंग टीमों, भारतीय फ़ौज और स्थानीय हितधारकों ने मिलकर काम किया। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, ऊँचाई और सीमित संसाधनों जैसी तमाम चुनौतियों के बावजूद आधुनिक टेलीकॉम ढाँचा स्थापित करना एक बड़ी उपलब्धि है।
यह पहल केवल बेहतर मोबाइल नेटवर्क तक सीमित नहीं है, बल्कि "विकसित कश्मीर" के विज़न को मज़बूत करने वाला एक अहम क़दम भी है। सरहदी और दूरदराज़ इलाक़ों तक डिजिटल सुविधाओं का विस्तार यह दर्शाता है कि विकास की रौशनी अब उन क्षेत्रों तक भी पहुँच रही है, जो कभी आधुनिक संचार व्यवस्था से महरूम थे। बांगुस घाटी और सीमारी में 5G सेवाओं का आग़ाज़ कश्मीर में डिजिटल तरक़्क़ी, बेहतर जनसुविधाओं और समावेशी विकास की दिशा में एक नई उम्मीद लेकर आया है।

0 टिप्पणियाँ