कार्यक्रम के दौरान ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अपने जीवन के तजुर्बों, कठिन मेहनत, अनुशासन और अंतरिक्ष तक के सफ़र के बारे में विस्तार से बात की। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि किसी भी बड़े मुक़ाम तक पहुँचने के लिए मज़बूत इरादा, लगातार मेहनत और अपने मक़सद पर यक़ीन सबसे अहम होता है। उन्होंने नौजवानों से कहा कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर इंसान अपने ख़्वाबों पर भरोसा रखे और ईमानदारी से मेहनत करे, तो कोई मंज़िल दूर नहीं रहती।
विद्यार्थियों ने भी पूरे जोश और दिलचस्पी के साथ उनसे सवाल पूछे। किसी ने अंतरिक्ष यात्रा के अनुभव के बारे में जानना चाहा, तो किसी ने भारतीय वायुसेना में करियर बनाने की राह पूछी। ग्रुप कैप्टन शुक्ला ने हर सवाल का बड़ी सादगी और खुलूस के साथ जवाब दिया, जिससे छात्रों का आत्मविश्वास और भी मज़बूत हुआ। इस दौरान विद्यार्थियों के चेहरों पर उत्साह और गर्व साफ़ दिखाई दे रहा था।
आर्मी गुडविल स्कूल के शिक्षकों का कहना था कि इस तरह की मुलाक़ातें बच्चों के लिए किताबों से बाहर निकलकर वास्तविक जीवन के नायकों से सीखने का बेहतरीन ज़रिया बनती हैं। जब छात्र ऐसे लोगों से मिलते हैं जिन्होंने अपने हौसले और मेहनत के दम पर देश का नाम रोशन किया हो, तो उनके अंदर भी कुछ बड़ा करने की तमन्ना पैदा होती है।
चिनार बुक फ़ेस्टिवल में आयोजित यह विशेष सत्र इस बात का भी सबूत बना कि कश्मीर में अब तालीम, साहित्य, विज्ञान और नवाचार को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रमों में नौजवान बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। वादी के छात्र अब सिर्फ़ स्थानीय अवसरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देश और दुनिया के बड़े मंचों पर अपनी पहचान बनाने के लिए तैयार दिखाई दे रहे हैं। ऐसे आयोजनों से उनमें आत्मविश्वास बढ़ रहा है और राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा से उनका जुड़ाव और मज़बूत हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय नायकों के साथ इस तरह का संवाद युवाओं के व्यक्तित्व निर्माण में अहम भूमिका निभाता है। इससे उनमें नेतृत्व क्षमता, वैज्ञानिक सोच और राष्ट्र के प्रति ज़िम्मेदारी की भावना विकसित होती है। कश्मीर के बदलते माहौल में इस तरह के सकारात्मक कार्यक्रम यह संदेश देते हैं कि यहां के नौजवान अब शिक्षा, विज्ञान, खेल और नवाचार के माध्यम से अपनी नई पहचान गढ़ रहे हैं।
चिनार बुक फ़ेस्टिवल में छात्रों और ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की यह मुलाक़ात केवल प्रेरणा का अवसर नहीं थी, बल्कि यह उस बदलते कश्मीर की तस्वीर भी पेश करती है जहाँ तालीम को तरक़्क़ी का सबसे बड़ा ज़रिया माना जा रहा है। वादी के नौजवान आज राष्ट्रीय नायकों से प्रेरणा लेकर अपने भविष्य को नई दिशा देने का संकल्प ले रहे हैं। यह आयोजन इस बात का प्रतीक है कि कश्मीर का युवा वर्ग अब आत्मविश्वास, इल्म और सकारात्मक सोच के साथ नए भारत की तरक़्क़ी में अपना अहम किरदार निभाने के लिए तैयार है। ऐसी प्रेरणादायक मुलाक़ातें आने वाली नस्लों में उम्मीद, वतन से मोहब्बत और उत्कृष्टता हासिल करने के जज़्बे को और भी मज़बूत करेंगी।
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