बलोचिस्तान मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर विरोध, लंदन में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ एहतिजाज


ब्रिटेन की राजधानी लंदन में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ एक अहम एहतिजाज देखने को मिला। दुनिया भर में टॉर्चर के शिकार अफ़राद के साथ यकजहती के लिए मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय दिवस के मौक़े पर, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के आधिकारिक निवास 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान पर बलोचिस्तान में इंसानी हुक़ूक़ की संगीन ख़िलाफ़वर्ज़ियों और रियासती ज़ुल्म के इल्ज़ाम लगाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बलोच अवाम बरसों से जबर, गुमशुदगियों और दमन का सामना कर रही है और अब इस मसले पर दुनिया की ख़ामोशी टूटनी चाहिए।

लंदन में 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर बड़ी तादाद में जमा हुए प्रदर्शनकारियों ने बलोचिस्तान की सूरत-ए-हाल पर गहरी फ़िक्र का इज़हार किया। एहतिजाज में शामिल लोगों ने बैनर और तख्तियां उठाकर पाकिस्तान के ख़िलाफ़ नारे लगाए और इल्ज़ाम लगाया कि बलोचिस्तान में इंसानी हुक़ूक़ का लगातार उल्लंघन हो रहा है।

मज़ाहिरेन का कहना था कि बलोच अवाम को बुनियादी आज़ादियों से महरूम रखा जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि कई सामाजिक कार्यकर्ताओं, तलबा, पत्रकारों और आम नागरिकों को जबरन ग़ायब किए जाने, गैर-क़ानूनी हिरासत और सख़्त कार्रवाई जैसी घटनाओं की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। उनका कहना था कि इन मामलों की निष्पक्ष और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच होनी चाहिए।

प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि बलोचिस्तान में रहने वाले लोगों की आवाज़ को दबाने की कोशिशें लंबे अरसे से जारी हैं। उनके मुताबिक़, जो लोग अपने हुक़ूक़, इंसाफ़ और बेहतर ज़िंदगी की बात करते हैं, उन्हें दबाव और कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। एहतिजाज में शामिल कई लोगों ने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से अपील की कि वह इस मसले को गंभीरता से ले और इंसानी हुक़ूक़ की हिफ़ाज़त के लिए असरदार क़दम उठाए।

यह प्रदर्शन ऐसे दिन आयोजित किया गया, जो दुनिया भर में टॉर्चर के शिकार लोगों के साथ यकजहती और इंसाफ़ की मांग के लिए समर्पित माना जाता है। इसी वजह से प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बलोचिस्तान का मुद्दा भी वैश्विक इंसानी हुक़ूक़ के एजेंडे का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर दुनिया के किसी भी हिस्से में ज़ुल्म और ज्यादती हो रही है तो उस पर आवाज़ उठाना पूरी इंसानियत की ज़िम्मेदारी है।

एहतिजाज के दौरान कई वक्ताओं ने पाकिस्तान की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ़ सामान्य हालात का दावा किया जाता है, जबकि दूसरी तरफ़ बलोचिस्तान से लगातार दमन, भय और इंसानी हुक़ूक़ के उल्लंघन की ख़बरें सामने आने का आरोप लगाया जाता है। उन्होंने कहा कि हालात की पारदर्शी समीक्षा और जवाबदेही से ही लोगों का भरोसा बहाल हो सकता है।

मज़ाहिरेन ने ब्रिटेन की हुकूमत, यूरोपीय मुल्कों और अंतरराष्ट्रीय इंसानी हुक़ूक़ से जुड़े इदारों से दरख़्वास्त की कि वे इस मसले पर गौर करें और उन तमाम इल्ज़ामात की निष्पक्ष पड़ताल का समर्थन करें जो बलोचिस्तान की सूरत-ए-हाल से जुड़े हैं। उनका कहना था कि इंसाफ़, जवाबदेही और इंसानी गरिमा के उसूल दुनिया के हर हिस्से में एक जैसे होने चाहिए।

लंदन के 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर हुआ यह एहतिजाज बलोचिस्तान के मसले को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा का विषय बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने बलोच अवाम के लिए इंसाफ़, इंसानी हुक़ूक़ की हिफ़ाज़त और कथित रियासती ज़ुल्म के ख़िलाफ़ वैश्विक स्तर पर आवाज़ बुलंद करने की अपील की।

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