रिपोर्टों के मुताबिक, हाल के दिनों में सामने आए कुछ वीडियो और तस्वीरों के आधार पर यह दावा किया गया है कि पहलगाम हमले से जुड़े बताए जा रहे एक संदिग्ध आतंकी को मंगला डैम क्षेत्र में हथियार चलाने का अभ्यास करते हुए देखा गया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इसके बावजूद सुरक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि ऐसे दावों की गंभीरता को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन रिपोर्टों की पुष्टि होती है, तो यह इस बात की ओर इशारा करेगा कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के कुछ हिस्सों का इस्तेमाल अब भी आतंकी संगठनों द्वारा सुरक्षित ठिकानों के रूप में किया जा रहा है। यह आरोप लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय रहे हैं।
सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि अतीत में भी कई रिपोर्टों में दावा किया गया था कि मंगला डैम और उसके आसपास के इलाक़ों का उपयोग कथित तौर पर प्रशिक्षण गतिविधियों के लिए किया जाता रहा है। कुछ रिपोर्टों में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कथित प्रशिक्षण कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया गया था। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
जानकारों का कहना है कि यदि किसी क्षेत्र में हथियारों का प्रशिक्षण, भर्ती और संगठित गतिविधियाँ लगातार जारी रहती हैं, तो इससे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौतियाँ पैदा होती हैं। ऐसे आरोप केवल पड़ोसी देशों की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में स्थिरता और शांति के लिए चिंता का विषय बनते हैं।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार इस बात पर ज़ोर देता रहा है कि किसी भी देश की ज़मीन का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों या सीमा पार हिंसा के लिए नहीं होना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र सहित कई वैश्विक मंच आतंकवाद के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई और जवाबदेही की आवश्यकता पर बल देते रहे हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए आतंकी ढांचे, वित्तीय सहायता, भर्ती नेटवर्क और प्रशिक्षण सुविधाओं पर भी प्रभावी रोक लगाना आवश्यक है। उनका मानना है कि यदि किसी क्षेत्र में ऐसे नेटवर्क सक्रिय पाए जाते हैं, तो उनके विरुद्ध पारदर्शी और ठोस कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय विश्वास बहाल करने के लिए महत्वपूर्ण होगी।
फ़िलहाल इन ताज़ा दावों को लेकर स्वतंत्र पुष्टि का इंतज़ार है। लेकिन इन रिपोर्टों ने एक बार फिर यह सवाल ज़रूर खड़ा कर दिया है कि क्या पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के कुछ हिस्सों में कथित आतंकी नेटवर्क अब भी सक्रिय हैं, और यदि हैं, तो उनके विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई कब और कैसे होगी।


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