इस मौके पर मिशन युवा (Mission YUVA) के तहत लाभार्थियों को व्यावसायिक वाहन (कमर्शियल व्हीकल) की चाबियाँ और स्वीकृति पत्र भी वितरित किए गए। यह पहल केवल सरकारी सहायता तक सीमित नहीं रही, बल्कि युवाओं को अपना कारोबार शुरू करने और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक मज़बूत क़दम साबित हुई। इससे यह एहसास भी मज़बूत हुआ कि अब कश्मीर का नौजवान केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोज़गार पैदा करने वाला उद्यमी बनने की सोच भी विकसित कर रहा है।
रोज़गार मेले के दौरान विभिन्न क्षेत्रों जैसे रिटेल, बैंकिंग, सर्विस सेक्टर, हॉस्पिटैलिटी, आईटी, सेल्स और अन्य उद्योगों से जुड़ी कंपनियों ने योग्य उम्मीदवारों का चयन किया। करियर काउंसलिंग विशेषज्ञों ने भी नौजवानों को बदलते रोज़गार बाज़ार, आवश्यक कौशल, डिजिटल दक्षता और स्वरोज़गार की संभावनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इससे युवाओं को अपनी योग्यता के अनुरूप सही करियर चुनने में मदद मिली।
मिशन युवा के अंतर्गत जिन लाभार्थियों को सहायता प्रदान की गई, उन्होंने इस पहल को अपनी ज़िंदगी में एक नए आग़ाज़ के तौर पर देखा। कई युवाओं ने कहा कि व्यावसायिक वाहन और वित्तीय सहायता मिलने से वे अपना परिवहन या अन्य छोटा व्यवसाय शुरू कर सकेंगे। उनका मानना है कि इससे न केवल उनकी आमदनी बढ़ेगी बल्कि भविष्य में वे दूसरे लोगों को भी रोज़गार देने की स्थिति में पहुँच सकते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में कौशल विकास, उद्यमिता और रोज़गार सृजन पर जिस तरह ध्यान दिया जा रहा है, उससे युवाओं की सोच में सकारात्मक बदलाव आया है। पहले जहाँ सरकारी नौकरी को ही सफलता का एकमात्र ज़रिया माना जाता था, वहीं अब निजी क्षेत्र, स्टार्टअप, स्वरोज़गार और उद्यमिता को भी बराबर अहमियत दी जा रही है। यही बदलाव कश्मीर की नई आर्थिक तस्वीर को मज़बूती प्रदान कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे रोज़गार मेले केवल नौकरी उपलब्ध कराने का माध्यम नहीं होते, बल्कि युवाओं और उद्योग जगत के बीच सीधा संपर्क स्थापित करने का प्रभावी मंच भी बनते हैं। इससे स्थानीय प्रतिभाओं को अपने ही क्षेत्र में अवसर मिलने की संभावना बढ़ती है और आर्थिक गतिविधियों को भी नई रफ़्तार मिलती है।
शोपियां का यह आयोजन इस बात का भी सुबूत है कि दक्षिण कश्मीर के नौजवान अब हुनर, शिक्षा और मेहनत के बल पर अपनी पहचान बनाने के लिए पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़ रहे हैं। सरकारी योजनाओं, कौशल विकास कार्यक्रमों और मिशन युवा जैसी पहलों से उन्हें आवश्यक सहयोग मिल रहा है, जिससे वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आत्मविश्वास के साथ क़दम बढ़ा रहे हैं।
यह रोज़गार मेला केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बदलते कश्मीर की उस नई तस्वीर का आईना है जहाँ नौजवान विकास, रोज़गार और उद्यमिता को अपनी तरक़्क़ी का आधार बना रहे हैं। "सशक्त युवा, आत्मनिर्भर कश्मीर" की थीम और "कश्मीर की आर्थिक तरक़्क़ी में युवाओं की भागीदारी" का संदेश इस आयोजन में साफ़ तौर पर नज़र आया। यह पहल उम्मीद जगाती है कि आने वाले वक़्त में ऐसे प्रयास रोज़गार के नए दरवाज़े खोलेंगे और कश्मीर के नौजवानों को आत्मनिर्भर, सक्षम और आर्थिक रूप से मज़बूत बनाने में अहम किरदार अदा करेंगे।


0 टिप्पणियाँ