राहिल और राफिद ने कम उम्र से ही क्रिकेट के मैदान में अपनी कड़ी मेहनत, लगन और बेहतरीन खेल का मुज़ाहिरा किया। स्थानीय स्तर पर आयोजित कई टूर्नामेंटों में दोनों भाइयों ने शानदार प्रदर्शन कर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। लगातार मेहनत और बेहतर प्रदर्शन का ही नतीजा है कि अब दोनों को जम्मू-कश्मीर की अंडर-19 टीम में अपनी जगह बनाने का मौका मिला है।
पुछल गांव के लोगों ने दोनों भाइयों की इस उपलब्धि पर फख्र का इज़हार किया है। गांव के बुज़ुर्गों और युवाओं का कहना है कि यह सफलता सिर्फ़ एक परिवार की नहीं बल्कि पूरे इलाके की कामयाबी है। उनका मानना है कि जब गांव के बच्चे बड़े मंच पर अपनी पहचान बनाते हैं तो उससे दूसरे नौजवानों को भी मेहनत करने और अपने सपनों को पूरा करने की प्रेरणा मिलती है।
स्थानीय खेल प्रेमियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में दक्षिण कश्मीर के नौजवानों का रुझान खेलों की तरफ़ तेजी से बढ़ा है। क्रिकेट, फुटबॉल, वुशु और अन्य खेलों में घाटी के युवा लगातार अपनी काबिलियत साबित कर रहे हैं। बेहतर खेल सुविधाएं, नियमित प्रतियोगिताएं और प्रशिक्षकों की रहनुमाई ने युवाओं को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर दिया है।
राहिल और राफिद की इस सफलता को कश्मीर के बदलते सामाजिक माहौल की एक सकारात्मक तस्वीर के तौर पर भी देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब नौजवान खेल, शिक्षा और हुनर की तरफ़ बढ़ते हैं तो समाज में सकारात्मक बदलाव की बुनियाद मजबूत होती है। खेल न सिर्फ़ अनुशासन और आत्मविश्वास सिखाता है बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने का भी सुनहरा ज़रिया बनता है।
दोनों भाइयों के परिवार ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि बच्चों की मेहनत आज रंग लाई है। उन्होंने बताया कि राहिल और राफिद ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद कभी अपनी प्रैक्टिस नहीं छोड़ी। परिवार ने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में दोनों खिलाड़ी जम्मू-कश्मीर ही नहीं बल्कि मुल्क का नाम भी रोशन करेंगे।
इलाके के कोचों और शिक्षकों ने भी दोनों खिलाड़ियों को मुबारकबाद देते हुए कहा कि उनकी सफलता आने वाली नस्लों के लिए एक मिसाल बनेगी। उनका कहना है कि खेल के मैदान में हासिल की गई यह कामयाबी यह साबित करती है कि अगर इरादा मजबूत हो और मेहनत में कोई कमी न हो तो बड़े से बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है।
अवाम का मानना है कि ऐसे नौजवानों की कामयाबियों को ज़्यादा से ज़्यादा सामने लाया जाना चाहिए ताकि घाटी के दूसरे बच्चे भी खेलों में अपना भविष्य तलाशें। खेल समाज को जोड़ने, सकारात्मक सोच विकसित करने और युवाओं को नई दिशा देने का सबसे असरदार ज़रिया माना जाता है।
राहिल यूनिस और राफिद यूनिस का जेकेसीए अंडर-19 टीम में चयन इस बात की दलील है कि दक्षिण कश्मीर की सरज़मीं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। ज़रूरत सिर्फ़ सही मार्गदर्शन, मेहनत और अवसर की है। दोनों भाइयों की यह उपलब्धि पूरे पुलवामा और जम्मू-कश्मीर के लिए गर्व का विषय है तथा यह संदेश देती है कि घाटी का नौजवान आज खेल, शिक्षा और उत्कृष्टता के रास्ते पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है।
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