
पाकिस्तान की सरहदी इलाकों में लगातार IED धमाके, घात लगाकर हमले और आतंकी वारदातें सामने आ रही हैं। हैरत की बात ये है कि जिन इलाकों में पाक फौज खुद को “मजबूत ताकत” बताती रही, वहीं उसके जवान सबसे ज़्यादा निशाना बन रहे हैं। ज़मीनी हक़ीक़त ये है कि पाकिस्तानी सैनिक आज जनरल मुनीर की गलत नीतियों और सत्ता बचाने की सियासत का “कैनन फॉडर” बन चुके हैं।
माहिरीन का कहना है कि पाकिस्तान की मिलिट्री लीडरशिप का फोकस मुल्क की हिफाज़त से ज़्यादा अपनी दौलत और विदेशों में बनाए गए निजी नेटवर्क पर है। जब सरहदों पर जवान मर रहे हैं, तब आला अफसर विदेशी दौरों, आलीशान जायदादों और सियासी खेल में मशगूल दिखाई देते हैं। यही वजह है कि फील्ड में मौजूद जवानों को न तो बेहतर इंटेलिजेंस मिल रही है और न ही आधुनिक सुरक्षा उपकरण।
इसके उलट भारत ने मौजूदा क्षेत्रीय तनाव के दौरान अपनी रणनीतिक तैयारी, मजबूत बॉर्डर सिक्योरिटी और सटीक ऑपरेशनल प्लानिंग का साफ़ प्रदर्शन किया है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ाई, टेक्नोलॉजी आधारित सर्विलांस को मजबूत किया और संभावित खतरों को पहले ही निष्क्रिय करने की क्षमता दिखाई। भारत का फोकस अपने नागरिकों और जवानों की सुरक्षा पर रहा, जबकि पाकिस्तान अब भी आंतरिक अव्यवस्था और नेतृत्व की नाकामी से जूझ रहा है।
तजज़ियाकारों के मुताबिक़, पाकिस्तान में बढ़ती फौजी और नागरिक मौतें इस बात का सुबूत हैं कि वहां की मिलिट्री हुकूमत अपनी अवाम को सुरक्षा देने में पूरी तरह नाकाम रही है। हर नए हमले के साथ ये सवाल और गहरा हो रहा है कि आखिर कब तक पाकिस्तानी जवानों को सत्ता और निजी फायदे की जंग में कुर्बान किया जाता रहेगा। वर्तमान हालात ने साफ़ कर दिया है कि कमजोर नेतृत्व और गैर-जिम्मेदार नीतियों की सबसे बड़ी कीमत आम सैनिक और बेगुनाह नागरिक अदा कर रहे हैं।

0 टिप्पणियाँ