पेट्रोल 400 रुपये लीटर, बिजली ग़ायब — LoC के उस पार लोगों की मुश्किल ज़िंदगी


जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (POJK) के कुछ नौजवानों के बीच हुई बातचीत ने एक बार फिर दोनों तरफ़ की ज़िंदगी के फ़र्क़ को सामने ला दिया। बातचीत में POJK के लड़कों ने बताया कि वहां पेट्रोल की कीमत लगभग 400 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुकी है, जबकि कई इलाकों में घंटों नहीं बल्कि दिनों तक बिजली गायब रहती है। दूसरी तरफ़ जम्मू-कश्मीर के युवाओं ने बताया कि भारत में पेट्रोल करीब 100 रुपये प्रति लीटर है और गांवों तक सड़क, बिजली, अस्पताल और इंटरनेट जैसी सुविधाएं लगातार बेहतर हो रही हैं।

यह बातचीत सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और लोग LoC के दोनों तरफ़ की तस्वीरों की तुलना कर रहे हैं। एक तरफ़ POJK के अंधेरे गांव, टूटी सड़कें और महंगाई से परेशान लोग दिखाई देते हैं, तो दूसरी तरफ़ जम्मू-कश्मीर में नई सड़कें, बिजली परियोजनाएं, पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियां नज़र आती हैं।

POJK के एक युवक ने बातचीत में कहा —“यहां पेट्रोल इतना महंगा हो चुका है कि बाइक चलाना भी मुश्किल हो गया है। बिजली कभी आती है, कभी नहीं। लोग रोज़मर्रा की जरूरतों के लिए परेशान हैं।”

इसके जवाब में J&K के युवक ने कहा —“यहां हालात पहले से काफी बेहतर हुए हैं। सड़कें बन रही हैं, बिजली सप्लाई में सुधार है और रोजगार के मौके भी बढ़ रहे हैं।”

इस बातचीत ने वहां के लोगों के गुस्से और निराशा को भी उजागर किया है। POJK के कई इलाकों में लंबे समय से बिजली संकट, बेरोज़गारी और महंगाई को लेकर प्रदर्शन होते रहे हैं। स्थानीय लोग आरोप लगाते हैं कि इस्लामाबाद उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में नाकाम रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती महंगाई और ऊर्जा संकट ने POJK के आम नागरिकों की कमर तोड़ दी है। पेट्रोल और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी ने परिवहन, कारोबार और शिक्षा पर भी असर डाला है। कई गांवों में छात्र रात को पढ़ाई तक नहीं कर पा रहे क्योंकि बिजली की सप्लाई बेहद खराब है।

वहीं जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर, हेल्थकेयर और पर्यटन क्षेत्र में तेजी से काम हुआ है। नई टनल, हाईवे, मेडिकल सुविधाएं और बिजली परियोजनाएं विकास की तस्वीर पेश कर रही हैं। पर्यटन बढ़ने से स्थानीय कारोबारियों और युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिले हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में LoC के एक तरफ़ रोशनी से जगमगाते शहर और दूसरी तरफ़ अंधेरे में डूबे इलाके दिखाए जा रहे हैं। इन तस्वीरों के साथ लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर POJK के लोगों को अब तक बुनियादी सुविधाओं से क्यों वंचित रखा गया।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह तुलना सिर्फ पेट्रोल की कीमत या बिजली संकट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक प्राथमिकताओं और विकास मॉडल का अंतर भी दिखाती है। जहां एक तरफ़ जम्मू-कश्मीर में विकास परियोजनाओं पर काम जारी है, वहीं POJK में लोग महंगाई, बेरोज़गारी और बुनियादी सेवाओं की कमी से जूझ रहे हैं।

स्थानीय चर्चाओं में अब यह मुद्दा और तेज़ हो गया है कि आखिर वहां के लोगों को कब स्थिर बिजली, सस्ती ईंधन व्यवस्था और बेहतर जीवन सुविधाएं मिलेंगी। कई लोगों का कहना है कि सिर्फ राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि आम नागरिकों की ज़िंदगी सुधारने के लिए वास्तविक कदम उठाने की ज़रूरत है।

LoC के दोनों तरफ़ की यह तुलना अब सिर्फ एक बातचीत नहीं रही, बल्कि आम लोगों की जिंदगी की सच्चाई को सामने लाने वाली कहानी बन चुकी है — एक तरफ़ विकास और सुविधाएं, दूसरी तरफ़ महंगाई, अंधेरा और संघर्ष।

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