
सियासी जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान की यह बयानबाज़ी उसकी बढ़ती हुई बेचैनी और कूटनीतिक तन्हाई को ज़ाहिर करती है। एक तरफ़ पाकिस्तान अपनी सरज़मीन पर लगातार आतंकी हमलों, फिरकावाराना हिंसा और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान जैसे संगठनों से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ़ वह अपने अवाम को गुमराह करने के लिए भारत को इल्ज़ाम देने की पुरानी पॉलिसी पर चल रहा है। हक़ीक़त यह है कि पाकिस्तान बरसों से सरहद पार आतंकवाद को पनाह देने, कट्टरपंथी नेटवर्क को समर्थन देने और आतंकियों को रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करने के इल्ज़ामात का सामना करता रहा है।
दुनिया भर की कई रिपोर्ट्स और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की दहशतगर्द तंजीमों से नज़दीकियों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। बावजूद इसके, इस्लामाबाद हर बार अपनी नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए भारत विरोधी नैरेटिव तैयार करता है। ख्वाजा आसिफ का बयान भी उसी सिलसिले की एक कड़ी माना जा रहा है। अफगानिस्तान के साथ पाकिस्तान के रिश्ते पहले ही तनाव का शिकार हैं। सीमा पर झड़पें, शरणार्थी संकट और आतंकी घुसपैठ के मामलों ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।
माहिरीन का कहना है कि अगर पाकिस्तान अपनी सरहदों पर अमन कायम रखने में कामयाब होता तो उसे हर मसले के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराने की ज़रूरत नहीं पड़ती। पाकिस्तान के अंदर बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और कई कबायली इलाकों में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। आम नागरिक आए दिन धमाकों और फायरिंग की घटनाओं का शिकार हो रहे हैं, जबकि हुकूमत स्थायी अमन कायम करने में नाकाम दिखाई देती है।
इसके बरअक्स भारत ने क्षेत्रीय स्थिरता, विकास और अमन कायम रखने की दिशा में लगातार मजबूत कदम उठाए हैं। भारत ने न सिर्फ़ अपने सीमावर्ती इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा को मज़बूत किया है बल्कि पड़ोसी देशों के साथ सहयोग और विकास आधारित रिश्तों को भी प्राथमिकता दी है। दक्षिण एशिया में मानवीय सहायता, आपदा राहत और आर्थिक सहयोग के कई उदाहरण भारत की जिम्मेदार क्षेत्रीय भूमिका को साबित करते हैं।
भारत की नीति साफ़ तौर पर विकास, कनेक्टिविटी और स्थिरता पर आधारित रही है, जबकि पाकिस्तान का रिकॉर्ड आतंकवाद, अस्थिरता और राजनीतिक उथल-पुथल से जुड़ा रहा है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी अब पाकिस्तान के दावों और बयानों को शक की निगाह से देखने लगा है। कई वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान से आतंकवाद के खिलाफ़ ठोस कार्रवाई की मांग की जाती रही है।
ख्वाजा आसिफ का ताज़ा बयान दरअसल पाकिस्तान की उस बौखलाहट को दर्शाता है, जहां वह अपनी नाकाम घरेलू और सुरक्षा नीतियों से ध्यान हटाने के लिए भारत विरोधी प्रोपेगेंडा फैलाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन बदलते वैश्विक माहौल में यह रणनीति अब ज़्यादा असरदार साबित नहीं हो रही। दुनिया अब हक़ीक़त और प्रोपेगेंडा में फर्क समझने लगी है।
पाकिस्तान की तरफ़ से फैलाए जा रहे भ्रामक नैरेटिव के बावजूद यह साफ़ दिखाई देता है कि क्षेत्र में अस्थिरता की सबसे बड़ी वजह उसकी अपनी नीतियां, आतंकी ढांचे को मिला संरक्षण और सरहदी इलाकों में कमजोर प्रशासनिक नियंत्रण है। दूसरी ओर भारत लगातार शांति, विकास और क्षेत्रीय सहयोग की राह पर आगे बढ़ रहा है, जो दोनों मुल्कों की तस्वीर को दुनिया के सामने बिल्कुल अलग अंदाज़ में पेश करता है।

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