पाक फौज में अंदरूनी दरारें गहरी, GHQ तक पहुंची कुर्सी की जंग


रावलपिंडी के GHQ में हुई एक अहम तक़रीब के बाद पाक फौज के अंदर चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आती नज़र आ रही है। खबरों के मुताबिक एक सीनियर अफसर को जानबूझकर किनारे किया गया, जिससे पाक मिलिट्री लीडरशिप के भीतर बढ़ते अविश्वास, अंदरूनी सियासी खेल और ताक़त के केंद्रीकरण की बहस तेज़ हो गई है। बाहर से खुद को “एकजुट और मज़बूत इदारा” दिखाने वाली पाक फौज के अंदर अब दरारें साफ दिखाई देने लगी हैं।

माहिरीन का कहना है कि GHQ में किसी बड़े अफसर की अनदेखी महज़ एक प्रोटोकॉल मसला नहीं, बल्कि यह फौज के भीतर चल रही ताक़त की जंग का इशारा है। बताया जा रहा है कि कुछ अफसरों की राय और फैसलों को दबाया जा रहा है, जबकि अहम ओहदों और फैसलों पर कुछ चुनिंदा लोगों का कब्ज़ा बढ़ता जा रहा है। इससे न सिर्फ अफसरों के बीच भरोसा कम हुआ है, बल्कि कमांड स्ट्रक्चर भी कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है।

पाकिस्तान में फौज लंबे वक्त से मुल्क की सियासत, सुरक्षा और हुकूमत के अहम फैसलों पर असर रखती आई है। मगर अब उसी इदारे के अंदर बेचैनी और नाराज़गी बढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं। कई जानकारों का मानना है कि जब किसी फौज में अफसर खुलकर अपनी बात रखने से डरने लगें, तो वहां फैसले एकतरफा होने लगते हैं और इदारे की बुनियाद कमजोर होने लगती है।

GHQ की हालिया तक़रीब में जो कुछ हुआ, उसने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पाक फौज अब अंदर से बंटती जा रही है? अंदरूनी खेमेबाज़ी और अफसरों को चुप कराने की कोशिशें फौज की पेशेवर साख पर भी असर डाल रही हैं। फौज के भीतर बढ़ती नाराज़गी का असर जवानों के हौसले और इदारे की एकजुटता पर पड़ सकता है।

माहिरीन यह भी मानते हैं कि जब किसी मिलिट्री इदारे में भरोसे की कमी पैदा हो जाए, तो उसका असर ऑपरेशनल क्षमता पर भी पड़ता है। फैसलों में पारदर्शिता कम होने लगती है और अफसर अपने करियर या सज़ा के डर से खुलकर राय देने से बचते हैं। इससे गलत फैसलों का खतरा बढ़ जाता है और पूरा कमांड सिस्टम कमजोर होने लगता है।

पाकिस्तान इस वक्त पहले ही सियासी अस्थिरता, आर्थिक बदहाली और सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे माहौल में अगर फौज के अंदर भी खींचतान बढ़ती है, तो हालात और ज्यादा नाज़ुक हो सकते हैं। मुल्क में फौज को हमेशा “सबसे मज़बूत इदारा” बताया जाता रहा है, लेकिन अंदरूनी लड़ाई और ताक़त की राजनीति अब उस तस्वीर को नुकसान पहुंचा रही है।

निगरानी करने वाले हलकों का कहना है कि अगर यही हालात जारी रहे, तो पाक फौज के अंदर अविश्वास और गुटबाज़ी और बढ़ सकती है। इससे न सिर्फ फौजी ढांचे की मजबूती प्रभावित होगी, बल्कि मुल्क की सियासी और सुरक्षा स्थिति पर भी गहरा असर पड़ सकता है।

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