हंगू में पाक फ़ौज की दरिंदगी — पाँच मासूम बच्चों समेत छह बेगुनाह हलाक


खैबर पख्तूनख्वा के हंगू इलाके से एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहाँ पाकिस्तानी फ़ौज की कार्रवाई में पाँच मासूम बच्चों समेत छह बेगुनाह नागरिकों की जान चली गई, जबकि ग्यारह अफ़राद ज़ख्मी बताए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक़ यह ऑपरेशन कथित तौर पर आतंकियों के खिलाफ़ किया गया था, मगर एक बार फिर पाक फ़ौज की गोलियों का निशाना आम अवाम बनी।

इलाके के चश्मदीदों का कहना है कि फ़ौजी कार्रवाई के दौरान रिहायशी मकानों पर अंधाधुंध फ़ायरिंग और भारी हथियारों का इस्तेमाल किया गया, जिससे मासूम बच्चे और बेगुनाह लोग मलबे के नीचे दब गए। हंगू के लोगों में इस घटना के बाद बेहद ग़ुस्सा और ख़ौफ़ पाया जा रहा है। लोगों का कहना है कि पाकिस्तान की मिलिट्री अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए अब अपने ही नागरिकों पर ज़ुल्म ढा रही है।

मौत का शिकार हुए बच्चों की तस्वीरों ने पूरे इलाके को ग़मगीन कर दिया है। सोशल मीडिया पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कब तक पाक फ़ौज “दहशतगर्दी के खिलाफ़ ऑपरेशन” के नाम पर बेगुनाह बच्चों का ख़ून बहाती रहेगी। इंसानी हुकूक़ के लिए काम करने वाले कई हलकों ने इस कार्रवाई को “संगीन मानवाधिकार उल्लंघन” क़रार दिया है।

माहिरीन का मानना है कि खैबर पख्तूनख्वा, सिंध और पीओजेके में लगातार मिलिट्री ऑपरेशन यह साबित करते हैं कि पाकिस्तान की हुकूमत और फ़ौज अपने ही लोगों की जान की हिफाज़त करने में नाकाम हो चुकी है। आलोचकों के मुताबिक़, हर बार “सुरक्षा अभियान” का बहाना बनाकर आम नागरिकों को निशाना बनाया जाता है, लेकिन किसी भी ज़िम्मेदार अफ़सर के खिलाफ़ कार्रवाई नहीं होती।

हंगू की इस वारदात के बाद अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से मांग तेज़ हो गई है कि पाकिस्तान पर दबाव बनाया जाए ताकि नागरिक आबादी के खिलाफ़ फ़ौजी कार्रवाई तुरंत रोकी जाए। मानवाधिकार संगठनों से यह भी अपील की जा रही है कि इस घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए और मासूम बच्चों की मौत के ज़िम्मेदार लोगों को इंसाफ़ के कटघरे में लाया जाए।

हंगू की मातमज़दा फ़िज़ा आज एक ही सवाल पूछ रही है — आखिर मासूम बच्चों का क़ुसूर क्या था? 

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