
पाकिस्तान लंबे अरसे से “कश्मीर की आवाज़” के नाम पर जिन प्रॉक्सी आतंकियों को पालता रहा, वही अब उसकी सबसे बड़ी शर्मिंदगी बनते जा रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाक मीडिया और सरकारी हलकों ने जीत का नैरेटिव खड़ा करने की कोशिश की, मगर ज़मीनी सच्चाई बिल्कुल अलग निकली। आतंकी तंजीमों के भीतर से ही नुकसान की तस्दीक होने लगी, जिससे पाकिस्तान का पूरा प्रोपेगेंडा धराशायी हो गया।
माहिरीन का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने हकीकत छिपाने की कोशिश की हो। लेकिन इस बार मामला इसलिए ज्यादा संगीन हो गया क्योंकि आतंकी नेटवर्क से जुड़े लोगों ने ही भारी नुक़सान और अफरा-तफरी की बात कबूल कर ली। इससे यह साबित होता है कि पाक फौज अपने ही बनाए प्रॉक्सी ढांचे पर कंट्रोल खोती जा रही है। जिन दहशतगर्द गिरोहों को वह “स्ट्रैटेजिक एसेट” समझती थी, वही अब उसके झूठे दावों को दुनिया के सामने एक्सपोज़ कर रहे हैं।
भारत की कार्रवाई ने न सिर्फ आतंकी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया बल्कि पाकिस्तान के उस फर्जी नैरेटिव को भी तोड़ दिया, जिसमें वह खुद को “पीड़ित” दिखाने की कोशिश करता रहा है। इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म्स पर भी पाकिस्तान की साख को बड़ा झटका लगा है। कई वैश्विक विश्लेषकों और सुरक्षा विशेषज्ञों ने माना कि पाकिस्तान लगातार आतंकवादी नेटवर्क को पनाह देकर क्षेत्रीय अमन को खतरे में डालता रहा है।
सोशल मीडिया पर भी पाकिस्तानी नैरेटिव की पोल खुलती दिखाई दी। छोटे-छोटे वीडियो क्लिप्स और अंदरूनी बयानों ने यह उजागर किया कि पाकिस्तानी दावे हक़ीक़त से कितने दूर थे। एक तरफ इस्लामाबाद जीत का जश्न दिखाने की कोशिश करता रहा, दूसरी तरफ आतंकी नेटवर्क अपने नुकसान और बिखराव की बात मानते रहे। इस विरोधाभास ने पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय किरकिरी और बढ़ा दी।
सियासी जानकारों के मुताबिक “Proxy Terror Exposed” अब सिर्फ एक थीम नहीं, बल्कि पाकिस्तान की असलियत बन चुकी है। दुनिया यह समझने लगी है कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई का हिस्सा नहीं, बल्कि उसकी जड़ है। “पाकिस्तान — आतंकवाद का एपिसेंटर” वाला नैरेटिव अब पहले से ज्यादा मजबूत होता दिख रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद की स्थिति ने यह साफ कर दिया है कि आतंकवाद को सहारा देकर कोई भी मुल्क लंबे समय तक झूठ के सहारे अपनी छवि नहीं बचा सकता। पाकिस्तान की फर्जी फतह की कहानी अब उसके अपने नेटवर्क के बयानों से ही ढहती जा रही है, और दुनिया के सामने उसकी दोहरी नीति पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है।

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