
पंचन पाथरी, जो अपनी दिलकश वादियों, घने जंगलों और साफ़-शफ़्फ़ाफ़ माहौल की वजह से मशहूर हो रहा है, अब इको-टूरिज़्म और एडवेंचर टूरिज़्म के नए मरकज़ के तौर पर उभरता दिखाई दे रहा है। फेस्टिवल में एटीवी राइड्स, साइक्लिंग रैली, ट्रैकिंग और दूसरे एडवेंचर एक्टिविटीज़ का खास इंतज़ाम किया गया, जिसने नौजवानों और सैलानियों में जबरदस्त जोश पैदा किया।
मंत्री सकीना इत्तू ने अपने ख़िताब में कहा कि सरकार की कोशिश है कि सिर्फ़ गुलमर्ग, पहलगाम और सोनमर्ग जैसे मशहूर टूरिस्ट स्पॉट्स तक ही सैर-सपाटा महदूद ना रहे, बल्कि कश्मीर के ऑफबीट और कम तलाश किए गए इलाकों को भी टूरिज़्म मैप पर लाया जाए। उन्होंने कहा कि पंचन पाथरी जैसे इलाके कुदरती हुस्न से मालामाल हैं और यहां इको-फ्रेंडली टूरिज़्म को बढ़ावा देकर स्थानीय लोगों के लिए रोज़गार और कारोबार के नए मौके पैदा किए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा, “हम चाह्ते हैं कि कश्मीर का हर इलाका अपनी अलग पहचान बनाए। पंचन पाथरी में बेशुमार टूरिज़्म पोटेंशियल मौजूद है। यहां एडवेंचर और नेचर टूरिज़्म को डेवलप करके नौजवानों को भी नए मौके मिलेंगे और इलाके की मआशी हालत भी मजबूत होगी।”
फेस्टिवल के दौरान स्थानीय कलाकारों ने कश्मीरी कल्चर और रिवायत को पेश करते हुए रंगारंग प्रोग्राम भी पेश किए। सूफियाना म्यूजिक, लोक नृत्य और पारंपरिक कश्मीरी दस्तकारी ने मेहमानों का दिल जीत लिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे प्रोग्राम्स से ना सिर्फ़ इलाके की पहचान बढ़ती है, बल्कि छोटे कारोबारियों, होटल मालिकों, टैक्सी ड्राइवर्स और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को भी फायदा पहुंचता है।
एटीवी राइड्स और साइक्लिंग रैली में बड़ी संख्या में युवाओं ने हिस्सा लिया। कई टूरिस्ट्स ने कहा कि पंचन पाथरी का शांत माहौल और खूबसूरत नज़ारे उन्हें बेहद पसंद आए। उनका कहना था कि अगर यहां बेहतर सड़कें, ठहरने की सुविधाएं और प्रचार-प्रसार किया जाए तो यह इलाका आने वाले वक्त में बड़ा टूरिस्ट डेस्टिनेशन बन सकता है।
इको-टूरिज़्म पर खास जोर देते हुए अधिकारियों ने कहा कि इलाके की प्राकृतिक खूबसूरती और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना टूरिज़्म को आगे बढ़ाया जाएगा। प्लास्टिक फ्री कैंपेन, साफ-सफाई और जंगलों की हिफाज़त जैसे पहलुओं पर भी लोगों को जागरूक किया गया। प्रशासन का कहना है कि स्थायी पर्यटन यानी टिकाऊ पर्यटन मॉडल पर काम किया जा रहा है ताकि आने वाली नस्लें भी कश्मीर की इस खूबसूरती का आनंद ले सकें।
माहिरीन का मानना है कि कश्मीर में एडवेंचर और इको-टूरिज़्म का तेजी से बढ़ता रुझान स्थानीय इकॉनमी के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। इससे गांवों में होम-स्टे, लोकल गाइड सर्विस, ट्रांसपोर्ट और हैंडीक्राफ्ट सेक्टर को नई जान मिलेगी।
फेस्टिवल में मौजूद कई नौजवानों ने सरकार से मांग की कि ऐसे प्रोग्राम्स सिर्फ़ एक दिन तक महदूद ना रहें बल्कि साल भर एडवेंचर एक्टिविटीज़ और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। उनका कहना था कि इससे कश्मीर के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने और रोजगार हासिल करने के बेहतर मौके मिलेंगे।
पंचन पाथरी टूरिज़्म फेस्टिवल ने एक बार फिर साबित किया है कि कश्मीर सिर्फ़ अपनी मशहूर वादियों तक सीमित नहीं, बल्कि यहां के दूर-दराज़ इलाके भी बेमिसाल खूबसूरती और टूरिज़्म की बड़ी क्षमता रखते हैं। सरकार और स्थानीय लोगों की मुश्तरका कोशिशें अगर इसी तरह जारी रहीं, तो आने वाले दिनों में पंचन पाथरी कश्मीर के नए पसंदीदा टूरिस्ट स्पॉट्स में शामिल हो सकता

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