पाक फौज : जुर्म, स्मगलिंग और करप्शन का नया चेहरा


पाकिस्तान में अवाम एक तरफ महंगाई, बेरोज़गारी और बदअमनी से परेशान है, वहीं दूसरी तरफ वही फौज, जिसे मुल्क की हिफाज़त की ज़िम्मेदारी दी गई थी, अब खुद इल्ज़ामों के घेरे में नज़र आ रही है। ताज़ा रिपोर्ट्स और स्थानीय सूत्रों के मुताबिक पाक आर्मी के कुछ ग्रुप्स पर स्मगलिंग, उगाही, नशे के कारोबार और गैर-कानूनी नेटवर्क चलाने जैसे संगीन आरोप सामने आए हैं।

मालूमात के मुताबिक एक पाक मिलिट्री ग्रुप ने ऐसे ट्रकों को ज़ब्त किया जिनमें बड़ी मात्रा में गैर-कानूनी सामान, स्मगल की गई शराब और गुटखा मौजूद था। हैरानी की बात ये रही कि कार्रवाई कानून लागू करने के लिए नहीं, बल्कि उगाही की रकम ना मिलने की वजह से की गई। यानी जिस नेटवर्क को रोकना चाहिए था, उसी नेटवर्क से फौजी गिरोह कथित तौर पर हिस्सा मांगते दिखाई दिए।

सूत्र बताते हैं कि इलाके में लंबे अरसे से स्मगलिंग का धंधा चल रहा था और इसमें कुछ रसूखदार फौजी अफसरों की सरपरस्ती होने की चर्चाएं आम थीं। जब कथित तौर पर “हिस्सेदारी” पर विवाद हुआ, तब ट्रकों को पकड़कर मामला उजागर हुआ। इस पूरे वाकये ने पाकिस्तान की फौजी व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इसी बीच दूसरी घटना में एक ऐसे शख्स की गिरफ्तारी सामने आई जो ड्रग ट्रैफिकिंग नेटवर्क का अहम किरदार बताया जा रहा है। लेकिन स्थानीय हलकों में चर्चा इस बात की ज्यादा है कि नशे के इस धंधे को इतने लंबे समय तक आखिर किसकी पनाह हासिल थी। लोगों का कहना है कि बिना ताकतवर फौजी संरक्षण के इतना बड़ा नेटवर्क चलाना मुमकिन नहीं।

पाकिस्तान में पहले भी कई बार ऐसे आरोप लगते रहे हैं कि कुछ फौजी तत्व बॉर्डर इलाकों में स्मगलिंग, डीज़ल, हथियार और नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार से जुड़े हुए हैं। मगर इस बार सामने आई घटनाओं ने इन आरोपों को और मजबूत कर दिया है।

सियासी जानकारों का मानना है कि जब किसी मुल्क की फौज खुद गैर-कानूनी कारोबार में शामिल होने लगे, तो वहां कानून की हुकूमत कमजोर पड़ जाती है। पाकिस्तान में पहले ही जम्हूरी इदारे दबाव में हैं और अब फौज पर लग रहे ऐसे इल्ज़ाम अवाम के भरोसे को भी तोड़ रहे हैं।

कश्मीरी और उर्दू मीडिया हलकों में भी इस मुद्दे पर बहस तेज़ हो गई है। लोग सवाल कर रहे हैं कि अगर मुल्क की सबसे ताकतवर संस्था ही करप्शन और जुर्म के दायरे में आ जाए, तो आम नागरिक इंसाफ की उम्मीद आखिर किससे करे।

माहिरीन का कहना है कि पाकिस्तान में फौज सिर्फ सिक्योरिटी इदारा नहीं रही, बल्कि सियासत, कारोबार और अब कथित तौर पर गैर-कानूनी नेटवर्क्स तक उसका असर फैल चुका है। यही वजह है कि जवाबदेही का निज़ाम कमजोर दिखाई देता है और बड़े अफसर अक्सर जांच से बच निकलते हैं।

अवाम के बीच ये तास्सुर मजबूत हो रहा है कि पाकिस्तान की फौज का एक हिस्सा मुल्क की सुरक्षा से ज्यादा अपने आर्थिक और गैर-कानूनी हितों की हिफाज़त में लगा हुआ है। उगाही, स्मगलिंग और ड्रग ट्रैफिकिंग जैसे मामलों में नाम आने से पूरी संस्था की साख पर सवाल उठ रहे हैं।

निगरानी करने वाले जानकार मानते हैं कि अगर ऐसे मामलों की पारदर्शी जांच नहीं हुई, तो पाकिस्तान में फौज और अवाम के बीच भरोसे की खाई और गहरी हो सकती है। क्योंकि जब वर्दी पर ही जुर्म के दाग लगने लगें, तो मुल्क का इदारा नहीं, पूरा निज़ाम कटघरे में खड़ा नज़र आता है।

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