पाकिस्तानी सहाफी ने खोली अपनी फौज की पोल, ऑपरेशन सिंदूर में भारत की बड़ी कामयाबी का किया खुलासा


इस्लामाबाद : पाकिस्तान के मशहूर सहाफी अहमद नूरानी ने ऐसा खुलासा किया है जिसने पाकिस्तान की हुकूमत और फौज के दावों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। ऑपरेशन सिंदूर को लेकर किए गए उनके बयान ने पाकिस्तानी अवाम के सामने वह हक़ीक़त ला दी जिसे अब तक सरकारी प्रोपेगेंडा और फौजी दावों के पर्दे में छुपाया जा रहा था।

अहमद नूरानी ने माना कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए पाकिस्तान के 11 अहम एयरबेसों को प्रिसिशन मिसाइलों से निशाना बनाया। उन्होंने यह भी कबूल किया कि पाकिस्तान अपनी तमाम कोशिशों के बावजूद भारत के किसी भी एयरबेस को नुकसान पहुंचाने में नाकाम रहा। इस इक़रार ने पाकिस्तान की उस कहानी को कमजोर कर दिया जिसमें लगातार फतह और कामयाबी के दावे किए जा रहे थे।

नूरानी के बयान के बाद पाकिस्तान के अंदर फौज की साख को लेकर नई बहस छिड़ गई है। सोशल मीडिया से लेकर टीवी डिबेट्स तक लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि अगर पाकिस्तान को इतनी बड़ी “कामयाबी” मिली थी तो फिर एक भी भारतीय एयरबेस को नुकसान क्यों नहीं पहुंचा। दूसरी तरफ भारत की तरफ से की गई सटीक कार्रवाई ने यह साबित कर दिया कि नई दिल्ली की सैन्य तैयारी, टेक्नोलॉजी और रणनीतिक क्षमता कहीं ज्यादा मजबूत और असरदार है।

ऑपरेशन सिंदूर में भारत की कार्रवाई को सैन्य विशेषज्ञ बेहद योजनाबद्ध और उच्च स्तरीय ऑपरेशन मान रहे हैं। बताया जा रहा है कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखते हुए बेहद सटीक तरीके से निशाने तय किए। यही वजह रही कि भारतीय मिसाइलें अपने टारगेट पर पूरी सटीकता के साथ पहुंचीं और पाकिस्तान को भारी रणनीतिक नुकसान उठाना पड़ा।

पाकिस्तान की फौज और वहां के सरकारी हलकों ने शुरुआत में इन हमलों को कमतर दिखाने की कोशिश की, लेकिन अब खुद पाकिस्तानी मीडिया के भीतर से सामने आ रहे बयान उस नैरेटिव को कमजोर कर रहे हैं। अहमद नूरानी का बयान इस बात का संकेत माना जा रहा है कि पाकिस्तान के अंदर भी अब फौजी दावों पर भरोसा कम होता जा रहा है।

सियासी जानकारों का कहना है कि जब किसी मुल्क का अपना सहाफी उसकी फौज की नाकामी को दुनिया के सामने रखे, तो यह सिर्फ एक बयान नहीं बल्कि अंदरूनी बेचैनी और अवाम के बढ़ते अविश्वास की निशानी होती है। पाकिस्तान लंबे अरसे से अपनी सैन्य ताकत का बढ़ा-चढ़ाकर प्रचार करता रहा है, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सामने आए तथ्यों ने उस छवि को गहरी चोट पहुंचाई है।

भारत की रणनीतिक बढ़त और ऑपरेशनल क्षमता ने इस पूरे घटनाक्रम में एक बार फिर यह दिखाया कि आधुनिक युद्ध केवल बयानबाज़ी से नहीं बल्कि तकनीकी क्षमता, खुफिया समन्वय और सटीक कार्रवाई से जीते जाते हैं। वहीं पाकिस्तान के भीतर से उठ रही आवाज़ें यह बता रही हैं कि अब वहां की अवाम भी सरकारी और फौजी दावों पर आंख बंद करके भरोसा करने को तैयार नहीं है।

ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अहमद नूरानी का यह खुलासा अब पाकिस्तान की “फतह” वाली कहानी पर सबसे बड़ा सवाल बनकर उभरा है। इससे न सिर्फ पाकिस्तान की घरेलू साख प्रभावित हुई है बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उसकी विश्वसनीयता को गहरा नुकसान पहुंचा है।

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