पाक फौज का आतंक प्रेम बेनकाब, जैश आतंकी के घर पहुँचा जनरल


पाकिस्तान एक बार फिर दुनिया के सामने बेनकाब हो गया है। “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद पाक सेना के वरिष्ठ अधिकारी मेजर जनरल ज़र्रार महमूद का मारे गए जैश-ए-मोहम्मद कमांडर के घर जाकर उसके परिवार से मुलाक़ात करना इस बात का खुला सबूत बन चुका है कि पाकिस्तान की फौज और आतंकी संगठनों के बीच रिश्ता कितना गहरा और पुराना है।

जिस मुल्क ने हमेशा दुनिया के सामने खुद को आतंकवाद के खिलाफ लड़ने वाला देश बताने की कोशिश की, उसी मुल्क की फौजी कयादत अब खुलेआम आतंकियों के घर पहुंचकर उन्हें सम्मान दे रही है। इस वाकये ने पाकिस्तान के उस झूठे नैरेटिव को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है, जिसमें वह खुद को “काउंटर टेररिज़्म पार्टनर” बताता रहा है।

मेजर जनरल ज़र्रार महमूद की यह मुलाक़ात महज़ एक ताज़ियती दौरा नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे पाकिस्तान की उस सरकारी और संस्थागत सोच का हिस्सा समझा जा रहा है, जहां आतंकवादी नेटवर्क्स को संरक्षण, समर्थन और इज़्ज़त दी जाती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर किसी देश की सेना के बड़े अधिकारी मारे गए आतंकी कमांडर के परिवार से मिलने जाएं, तो यह साफ इशारा होता है कि आतंकवाद वहां सिर्फ गैर-राज्य तत्वों की हरकत नहीं, बल्कि सत्ता के अंदर मौजूद ताकतों की सरपरस्ती में पल रहा है।

इस घटना ने पाकिस्तान की घरेलू और अंतरराष्ट्रीय साख को गहरा नुकसान पहुंचाया है। दुनिया भर में पहले ही पाकिस्तान पर आतंकियों को पनाह देने के इल्ज़ाम लगते रहे हैं, लेकिन अब फौजी अधिकारियों की ऐसी गतिविधियां उन इल्ज़ामों को और मज़बूत कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय में यह सवाल फिर उठने लगा है कि आखिर पाकिस्तान कब तक “अच्छे और बुरे आतंकवादी” की नीति पर चलता रहेगा।

कश्मीर से लेकर अफगानिस्तान तक, कई बार पाकिस्तान पर आतंकवादी संगठनों को ट्रेनिंग, फंडिंग और सुरक्षित ठिकाने देने के आरोप लग चुके हैं। लेकिन हर बार इस्लामाबाद इन आरोपों से इनकार करता रहा। अब मेजर जनरल ज़र्रार महमूद की यह मुलाक़ात उन दावों की पोल खोल रही है।

सियासी जानकारों का मानना है कि इस तरह के कदम पाकिस्तान के भीतर भी अवाम के भरोसे को कमजोर कर रहे हैं। एक तरफ आम पाकिस्तानी नागरिक महंगाई, बेरोज़गारी और अस्थिरता से परेशान है, वहीं दूसरी तरफ फौज पर यह इल्ज़ाम और मजबूत हो रहा है कि वह मुल्क की तरक़्क़ी से ज्यादा आतंकवादी नेटवर्क्स को बचाने में दिलचस्पी रखती है।

“टेरर नेक्सस रिवील्ड बाय विज़िट” अब सिर्फ एक बयान नहीं बल्कि एक ऐसी हक़ीक़त बनती जा रही है, जिसे दुनिया खुली आंखों से देख रही है। पाकिस्तान की फौज और आतंकी संगठनों के बीच यह कथित रिश्ता दक्षिण एशिया की अमन-ओ-अमान के लिए बड़ा खतरा माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पाकिस्तान वास्तव में आतंकवाद के खिलाफ गंभीर है, तो उसे सिर्फ बयानबाज़ी नहीं बल्कि ऐसे रिश्तों को खत्म करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। वरना इस तरह की घटनाएं यह साबित करती रहेंगी कि पाकिस्तान की सत्ता और आतंकवाद के बीच की लकीर अब लगभग मिट चुकी है।

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