नया कश्मीर : ख़वातीन के हाथों मज़बूत हो रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था


मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह साहब ने जम्मू-कश्मीर में ख़वातीन को ख़ुदमुख्तार बनाने वाली “उम्मीद” स्कीम की ज़बरदस्त सराहना की है। उन्होंने कहा कि ये प्रोग्राम सिर्फ़ एक सरकारी पहल नहीं, बल्कि गांवों की तक़दीर बदलने वाला एक बड़ा इन्कलाबी क़दम साबित हो रहा है। “उम्मीद” के ज़रिये लाखों देहाती ख़वातीन को रोज़गार, कारोबार और बेहतर ज़िंदगी का रास्ता मिला है, जिससे पूरे जम्मू-कश्मीर में तरक़्क़ी की एक नई फ़िज़ा क़ायम हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सेल्फ हेल्प ग्रुप्स यानी SHGs ने गांवों की मआशी हालत को मज़बूत करने में अहम किरदार अदा किया है। आज “उम्मीद” मिशन के तहत 8 लाख 10 हज़ार से ज़्यादा ख़वातीन को एक मज़बूत नेटवर्क से जोड़ा गया है। इन ख़वातीन ने अपनी मेहनत, हुनर और जज़्बे से साबित कर दिया कि अगर मौक़ा मिले तो गांवों की बेटियां और मांएं भी मआशी इन्कलाब ला सकती हैं।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़, “उम्मीद” मिशन के तहत SHGs को 3,106 करोड़ रुपये का बैंक क्रेडिट हासिल हुआ है, जबकि 820 करोड़ रुपये की कैपिटलाइज़ेशन सपोर्ट भी दी गई है। इससे गांवों में छोटे कारोबार, डेयरी, हैंडलूम, पशुपालन, मशरूम खेती, मधुमक्खी पालन और दूसरे हाई-वैल्यू एंटरप्राइजेज़ को नई रफ़्तार मिली है। गांवों की कई ख़वातीन अब अपने कारोबार की मालिक बन चुकी हैं और अपने घरों की मआशी हालत सुधार रही हैं।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने “लखपति दीदी” पहल को भी जम्मू-कश्मीर की ग्रामीण तरक़्क़ी का नया चेहरा करार दिया। उन्होंने ऐलान किया कि इस स्कीम को अब 32 हज़ार और घरानों तक बढ़ाया जाएगा। इस पहल का मक़सद गांवों की ख़वातीन को इतना मज़बूत बनाना है कि उनकी सालाना आमदनी लाख रुपये या उससे ज़्यादा तक पहुंचे। इससे ना सिर्फ़ ग़रीबी कम होगी बल्कि गांवों में आत्मनिर्भरता और खुशहाली का नया दौर शुरू होगा।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर का “नया कश्मीर” विज़न तभी मुकम्मल होगा जब गांव मज़बूत होंगे और ख़वातीन तरक़्क़ी की बराबर की शरीक बनेंगी। “उम्मीद” मिशन ने साबित किया है कि अगर सही रहनुमाई, बैंकिंग सपोर्ट और बाज़ार तक पहुंच दी जाए तो ग्रामीण ख़वातीन बड़े कारोबार भी कामयाबी से चला सकती हैं।

विज़ुअल्स में गांवों की ख़वातीन को अपने प्रोडक्ट्स तैयार करते, SHG मीटिंग्स में हिस्सा लेते, बैंकिंग और डिजिटल ट्रेनिंग हासिल करते और अपने कारोबार को कामयाबी से चलाते हुए दिखाया गया। कई जगहों पर महिलाएं मशरूम यूनिट्स, डेयरी फार्म्स और हैंडीक्राफ्ट सेंटर चलाती नज़र आईं, जो जम्मू-कश्मीर में बदलती हुई देहाती ज़िंदगी की नई तस्वीर पेश कर रही थीं।

अवाम का कहना है कि “उम्मीद” और “लखपति दीदी” जैसी स्कीमों ने गांवों में उम्मीद, रोज़गार और आत्मविश्वास की नई रोशनी पैदा की है। लोगों का मानना है कि ये पहल आने वाले वक़्त में जम्मू-कश्मीर को ख़वातीन की अगुवाई वाली तरक़्क़ी का एक कामयाब मॉडल बनाएगी।

नैरेशन का पैग़ाम साफ़ था — “नया कश्मीर”, जहां ख़वातीन की मेहनत, हुनर और ख़ुदमुख्तारी गांवों की तरक़्क़ी की सबसे बड़ी ताक़त बन रही है।

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