सीमावर्ती और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच आज भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। खासकर जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों को मौसम, दूरी और सीमित संसाधनों के कारण समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिल पाती। ऐसे कठिन परिस्थितियों में भारतीय सेना केवल सुरक्षा का ही नहीं, बल्कि मानवीय सेवा का भी महत्वपूर्ण दायित्व निभा रही है। इसी कड़ी में भारतीय सेना द्वारा बांदीपोरा जिले की तुलैल घाटी के दूरस्थ सरोदाब गांव में चलाया गया ‘मेडिक ऑन फुट’ अभियान लोगों के लिए राहत और उम्मीद लेकर आया।
यह अभियान विशेष रूप से गर्मियों के मौसम में होने वाली मौसमी बीमारियों से बचाव और ग्रामीणों तक आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। सेना की मेडिकल टीम पैदल चलकर गांव के घर-घर पहुंची और लोगों को प्राथमिक चिकित्सा, स्वास्थ्य जांच तथा जरूरी सलाह प्रदान की। दुर्गम पहाड़ी रास्तों से होकर ग्रामीणों तक पहुंचना आसान कार्य नहीं था, लेकिन सेना के जवानों और चिकित्सा कर्मियों ने सेवा और समर्पण की मिसाल पेश की।
सरोदाब गांव जैसे दूरस्थ इलाकों में रहने वाले बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे अक्सर स्वास्थ्य सेवाओं की कमी से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। अभियान के दौरान सेना की टीम ने ग्रामीणों का रक्तचाप, बुखार, संक्रमण और अन्य सामान्य बीमारियों की जांच की। इसके साथ ही लोगों को साफ-सफाई, पोषण, स्वच्छ पेयजल और बदलते मौसम में स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों के बारे में जागरूक किया गया। कई जरूरतमंद लोगों को मौके पर ही दवाइयां भी उपलब्ध कराई गईं।
‘मेडिक ऑन फुट’ केवल एक स्वास्थ्य अभियान नहीं बल्कि सेना और स्थानीय समुदाय के बीच विश्वास और मानवीय जुड़ाव का प्रतीक है। भारतीय सेना वर्षों से जम्मू-कश्मीर के दूरदराज क्षेत्रों में राहत कार्यों, चिकित्सा शिविरों, शिक्षा सहायता और आपदा प्रबंधन के माध्यम से लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में योगदान देती रही है। इस प्रकार के अभियान यह दर्शाते हैं कि सेना केवल सीमाओं की रक्षा ही नहीं करती, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण को भी समान प्राथमिकता देती है।
तुलैल घाटी का क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील और कठिन माना जाता है। यहां कई गांव ऐसे हैं जहां स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचने में घंटों लग जाते हैं। ऐसे में सेना की मेडिकल टीम का गांव तक पहुंचना ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत साबित हुआ। स्थानीय लोगों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए सेना के प्रति आभार व्यक्त किया।
आज के समय में जब स्वास्थ्य जागरूकता अत्यंत आवश्यक है, ऐसे अभियान समाज में सकारात्मक संदेश फैलाते हैं। ग्रामीणों को समय पर स्वास्थ्य सलाह मिलने से कई बीमारियों को गंभीर होने से पहले ही रोका जा सकता है। विशेष रूप से मौसम परिवर्तन के दौरान वायरल संक्रमण, बुखार और अन्य समस्याओं से बचाव के लिए जागरूकता बेहद जरूरी होती है।
भारतीय सेना का यह प्रयास “स्वस्थ नागरिक, मजबूत राष्ट्र” की भावना को साकार करता है। सेवा, करुणा और मानवता के मूल्यों पर आधारित यह अभियान यह दिखाता है कि सच्ची राष्ट्रसेवा केवल सीमाओं तक सीमित नहीं होती, बल्कि लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में भी निहित होती है।
सरोदाब गांव में आयोजित ‘मेडिक ऑन फुट’ अभियान निश्चित रूप से मानव सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रेरणादायक उदाहरण है। यह पहल न केवल स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का माध्यम बनी, बल्कि लोगों के दिलों में विश्वास, सुरक्षा और अपनापन भी मजबूत करने में सफल रही।

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