गुरेज़ की वादियों में फौज और अवाम का रिश्ता हुआ और मज़बूत, पूर्व सैनिकों के लिए लगाया गया ख़ास वेलफेयर कैंप


गुरेज़ घाटी की खूबसूरत वादियों में हिंदुस्तानी फौज की जानिब से एक अहम और दिल छू लेने वाला “एक्स-सर्विसमैन इंटरैक्शन प्रोग्राम” मुनअकिद किया गया, जिसमें इलाके के 47 पूर्व सैनिकों और 4 वीर नारियों ने शिरकत की। इस प्रोग्राम का मकसद सिर्फ मुलाक़ात तक महदूद नहीं था, बल्कि फौज और अवाम के दरमियान भरोसे, इज़्ज़त और आपसी ताल्लुकात को और मज़बूत बनाना भी इसका अहम हिस्सा रहा।

इस मौके पर इंडियन आर्मी के अफसरान ने पूर्व सैनिकों और शहीद जवानों की बेवाओं के मसाइल बड़े गौर से सुने और उनके हल के लिए मौके पर ही जरूरी कदम उठाने की कोशिश की। पॉलिसी से जुड़े मसाइल, पेंशन, मेडिकल सहूलियतें और दस्तावेज़ी परेशानियों पर तफ्सील से बातचीत की गई। फौज की तरफ से यह पैगाम दिया गया कि मुल्क की हिफाज़त में अपना किरदार निभाने वाले जवान कभी अकेले नहीं हैं और हिंदुस्तानी फौज हर हाल में उनके साथ खड़ी है।

प्रोग्राम के दौरान मेडिकल और डेंटल कैंप भी लगाया गया, जहाँ डॉक्टरों की टीम ने पूर्व सैनिकों, उनके खानदानों और वीर नारियों का मुफ्त इलाज और चेकअप किया। दूर-दराज़ पहाड़ी इलाकों में इस तरह की मेडिकल सुविधाएँ अक्सर आसानी से मयस्सर नहीं होतीं, ऐसे में फौज की यह कोशिश लोगों के लिए बड़ी राहत साबित हुई। कई बुजुर्ग पूर्व सैनिकों ने इस पहल को “उम्मीद की नई किरण” करार दिया।

एक पूर्व सैनिक ने जज़्बाती अंदाज़ में कहा, “फौज ने हमें कभी भुलाया नहीं। आज भी हमारे मसाइल सुने जा रहे हैं और हमारी सेहत का ख़याल रखा जा रहा है। इससे दिल को बड़ा सुकून मिलता है।”

इस प्रोग्राम में सिर्फ वेलफेयर और हेल्थ सपोर्ट ही नहीं बल्कि समाजी बेहतरी और जागरूकता पर भी खास ज़ोर दिया गया। इंडियन आर्मी की तरफ से “स्वच्छ भारत अभियान” और “नशा मुक्त भारत अभियान” के हवाले से लोगों को जागरूक किया गया। नौजवानों को साफ-सफाई, सेहतमंद जिंदगी और नशे जैसी बुराइयों से दूर रहने का पैगाम दिया गया। फौज के अफसरों ने कहा कि एक मजबूत और तरक़्क़ीपसंद समाज के लिए अवाम और फौज का मिलकर काम करना बेहद जरूरी है।

गुरेज़ जैसे सरहदी इलाके में, जहाँ मौसम और हालात अक्सर चुनौतीपूर्ण रहते हैं, वहाँ इस तरह के प्रोग्राम लोगों के दिलों में भरोसा और अपनापन पैदा करते हैं। स्थानीय लोगों ने भी इंडियन आर्मी की इस पहल की खुलकर तारीफ़ की और कहा कि फौज सिर्फ सरहदों की निगहबानी नहीं करती बल्कि लोगों के दुख-दर्द में भी शरीक रहती है।

वीर नारियों के लिए भी यह कार्यक्रम बेहद मायने रखता था। शहीद जवानों की बेवाओं ने कहा कि फौज की तरफ से मिलने वाली इज़्ज़त और सहयोग उन्हें हौसला देता है। कई महिलाओं ने अपनी परेशानियाँ अफसरों के सामने रखीं, जिन पर जल्द कार्रवाई का भरोसा दिलाया गया।

इंडियन आर्मी की यह पहल “कम्युनिटी वेलफेयर एंड सिविल-मिलिट्री एंगेजमेंट” की एक बेहतरीन मिसाल बनकर सामने आई है। इससे यह साफ जाहिर होता है कि फौज सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि समाजी जिम्मेदारियों को निभाने में भी आगे रहती है।

गुरेज़ घाटी में आयोजित यह कार्यक्रम एक बार फिर साबित करता है कि हिंदुस्तानी फौज और स्थानीय अवाम के दरमियान रिश्ता सिर्फ ड्यूटी का नहीं, बल्कि भरोसे, मोहब्बत और इंसानियत का भी है। इलाके के लोगों को उम्मीद है कि आने वाले वक्त में भी ऐसे कार्यक्रम जारी रहेंगे, जिससे समाज में एकता, भरोसा और तरक़्क़ी का माहौल और मजबूत होगा।

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