
जानकारी के मुताबिक 25 मई 2026 को गुलमर्ग इलाके में तेज बारिश और सख्त हवाओं के चलते गोंडोला सेवा अचानक प्रभावित हो गई। खराब मौसम के कारण लगभग 65 केबिन हवा में रुक गए, जिनमें बच्चे, बुज़ुर्ग, ख़वातीन और बाहर से आए टूरिस्ट मौजूद थे। ऊँचाई पर फँसे सैलानियों में डर और बेचैनी का माहौल पैदा हो गया, क्योंकि मौसम लगातार खराब होता जा रहा था।
हालात की नज़ाकत को देखते हुए भारतीय सेना ने फौरन रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। सेना के स्पेशलिस्ट जवानों के साथ जम्मू-कश्मीर पुलिस और स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फ़ोर्स (SDRF) की टीमों ने मौके पर पहुँचकर संयुक्त कार्रवाई की। मुश्किल मौसम और फिसलन भरे पहाड़ी इलाके के बावजूद जवानों ने बेहतरीन प्रोफेशनलिज़्म और सब्र का मुज़ाहिरा करते हुए ऑपरेशन को अंजाम दिया।
रेस्क्यू टीमों ने एक-एक केबिन तक पहुँचकर अंदर मौजूद लोगों को सुरक्षित नीचे उतारा। कई बुज़ुर्ग सैलानी घबराए हुए थे, जिन्हें जवानों ने अपने कंधों का सहारा देकर सुरक्षित स्थान तक पहुँचाया। बच्चों और महिलाओं को पहले निकाला गया ताकि अफरा-तफरी की स्थिति पैदा न हो। ऑपरेशन के दौरान मेडिकल सहायता भी उपलब्ध रखी गई और जरूरतमंद लोगों को मौके पर प्राथमिक उपचार दिया गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक मौसम बेहद खराब था और तेज हवाओं के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन आसान नहीं था, लेकिन सुरक्षा बलों ने पूरे तालमेल और ट्रेनिंग के साथ हालात को कंट्रोल में रखा। कई टूरिस्ट्स ने भारतीय सेना और स्थानीय प्रशासन का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि जवानों ने न सिर्फ उनकी जान बचाई बल्कि मुश्किल घड़ी में हौसला भी दिया।
एक सैलानी ने बताया, “हम काफी डर गए थे। बच्चे रो रहे थे और मौसम लगातार बिगड़ रहा था। लेकिन सेना के जवान जिस तरीके से हमारी मदद के लिए आए, उससे हमें भरोसा मिला कि हम सुरक्षित बाहर निकल जाएंगे।”
इस पूरे ऑपरेशन ने भारतीय सुरक्षा बलों की तैयारियों, तेज रिस्पॉन्स क्षमता और इंसानी जज़्बे को फिर से उजागर किया। पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में इस तरह के ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण माने जाते हैं, मगर सेना और दूसरी एजेंसियों के बीच शानदार कोऑर्डिनेशन की वजह से बड़ी दुर्घटना टल गई।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि गुलमर्ग रेस्क्यू ऑपरेशन सिर्फ एक बचाव मिशन नहीं था, बल्कि यह इस बात का मजबूत पैगाम भी है कि भारतीय सेना हर हाल में कश्मीर की अवाम और सैलानियों की हिफाज़त के लिए तैयार रहती है। प्राकृतिक आपदा हो, बर्फबारी हो या कोई दूसरी इमरजेंसी, सेना हमेशा सबसे पहले राहत और बचाव के काम में आगे दिखाई देती है।
कश्मीर आने वाले सैलानियों के लिए भी यह घटना भरोसे का बड़ा संदेश लेकर आई है। जिस तरह विभिन्न एजेंसियों ने मिलकर हालात को संभाला, उससे यह साबित हुआ कि घाटी में टूरिस्ट्स की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
गौरतलब है कि गुलमर्ग गोंडोला दुनिया की सबसे ऊँची और मशहूर केबल कार सेवाओं में शामिल है, जहाँ हर साल हजारों सैलानी पहुंचते हैं। मौसम की अचानक तब्दीली के बावजूद सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता ने एक संभावित बड़े हादसे को टाल दिया।
इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन ने एक बार फिर यह एहसास दिलाया कि भारतीय सेना सिर्फ सरहदों की निगहबान नहीं, बल्कि कश्मीर के लोगों और मेहमानों के लिए उम्मीद, भरोसे और इंसानियत की सबसे मजबूत मिसाल भी है।

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