करनाह में भारतीय सेना द्वारा कैंसर स्क्रीनिंग कैंप आयोजित, 300 से अधिक लोग लाभान्वित


कश्मीर के दूर-दराज़ सरहदी इलाक़ों में, जहाँ 
मुश्किल पहाड़, सख़्त मौसम और सीमित सहूलियतों की वजह से बुनियादी सुविधाओं तक पहुँचना आसान नहीं होता, वहाँ भारतीय सेना उम्मीद, भरोसे और इंसानियत की एक मज़बूत मिसाल बनकर सामने आती रही है। मुल्क की सरहदों की हिफ़ाज़त के साथ-साथ सेना ने हमेशा दूरदराज़ बस्तियों में रहने वाले लोगों की भलाई और मदद को भी अपनी ज़िम्मेदारी समझा है। हाल ही में कुपवाड़ा ज़िले के करनाह में सब-डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल (SDH) में आयोजित कैंसर स्क्रीनिंग और मल्टी-स्पेशियलिटी मेडिकल कैंप इसी इंसानी ख़िदमत की एक रौशन मिसाल है।


भारतीय सेना और जिला प्रशासन कुपवाड़ा के मुश्तरका इहतिमाम में लगाए गए इस मेडिकल कैंप में स्थानीय लोगों ने बड़ी तादाद में शिरकत की। करनाह और उसके आसपास के इलाक़ों से आए 300 से ज़्यादा लोगों ने इस कैंप में मुफ़्त और ख़ास मेडिकल सहूलियतों का फ़ायदा उठाया। इस पहल का मक़सद उन सरहदी इलाक़ों में बेहतर इलाज की सुविधा पहुँचाना था, जहाँ मुश्किल भौगोलिक हालात और कम इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से स्पेशलिस्ट डॉक्टरों तक पहुँचना आसान नहीं होता।

कैंप में कैंसर स्क्रीनिंग के अलावा कई बीमारियों के लिए स्पेशलिस्ट डॉक्टरों द्वारा चेकअप और इलाज की सहूलियत भी दी गई। तजुर्बेकार डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ़ ने मरीजों का बारीकी से मुआयना किया और उन्हें ज़रूरी मशवरे दिए। बहुत से लोगों, ख़ास तौर पर बुज़ुर्गों और ग़रीब तबक़े के लिए यह कैंप किसी नेमत से कम नहीं था, क्योंकि उन्हें अपने ही इलाके में बेहतर इलाज और माहिर डॉक्टरों की सलाह नसीब हुई।

कैंसर स्क्रीनिंग इस मेडिकल कैंप का सबसे अहम हिस्सा रही। करनाह जैसे दूरदराज़ इलाक़ों में आज भी लोगों में कैंसर जैसी बीमारियों के बारे में जागरूकता कम पाई जाती है। अक्सर लोग इलाज में देर कर देते हैं क्योंकि उनके पास बड़े अस्पतालों या स्पेशलिस्ट डॉक्टरों तक पहुँचने के ज़रिये नहीं होते। भारतीय सेना की इस कोशिश ने लोगों को यह समझाने में मदद की कि वक़्त पर बीमारी की पहचान और इलाज कितनी अहमियत रखता है। बीमारी का शुरुआती दौर में पता चलना कई कीमती जानें बचा सकता है।

स्थानीय लोगों ने भारतीय सेना की इस इंसानी पहल का दिल खोलकर इस्तक़बाल किया। दूर-दराज़ गाँवों से आए लोगों ने सेना का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि ऐसे मेडिकल कैंप सरहदी इलाक़ों के लोगों के लिए “उम्मीद की किरण” हैं। कई लोगों ने इसे करनाह के अवाम के लिए “लाइफ़ लाइन” क़रार दिया।

कैंप में आए एक बुज़ुर्ग शख़्स, जो पिछले कई महीनों से सेहत से जुड़ी परेशानियों का सामना कर रहे थे, ने बताया कि माली मुश्किलात और सफ़र की परेशानियों की वजह से वे बड़े शहरों के अस्पतालों तक नहीं पहुँच पा रहे थे। मेडिकल कैंप में डॉक्टरों ने उनका मुकम्मल चेकअप किया और आगे के इलाज के लिए ज़रूरी मशवरे दिए, जिससे उन्हें काफ़ी राहत और तसल्ली मिली। इसी तरह ख़वातीन और बुज़ुर्गों ने भी इस बात पर ख़ुशी ज़ाहिर की कि उन्हें लंबा और महंगा सफ़र किए बग़ैर माहिर डॉक्टरों से मशवरा करने का मौक़ा मिला।

इस कैंप में स्थानीय नौजवानों और वालंटियर्स ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने मरीजों की रजिस्ट्रेशन और इंतज़ामात में मदद की। इससे सेना और स्थानीय लोगों के दरमियान बढ़ते भरोसे और मोहब्बत का भी साफ़ पैग़ाम मिला। ऐसी पहलें सिर्फ़ इलाज तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि समाज में यकजहती और आपसी एतमाद को भी मज़बूत करती हैं।

बरसों से भारतीय सेना कश्मीर में मेडिकल कैंपों, तालीमी प्रोग्रामों, राहत कार्यों और इंसानी मदद के ज़रिये लोगों की ज़िंदगी बेहतर बनाने में अहम किरदार निभाती रही है। करनाह जैसे सरहदी इलाक़ों में, जहाँ भारी बर्फ़बारी और खराब मौसम की वजह से रास्ते और संपर्क टूट जाते हैं, वहाँ सेना अक्सर सबसे पहले मदद के लिए पहुँचती है।

भारतीय सेना की यह हेल्थकेयर आउटरीच इस बात की गवाह है कि मुल्क की सुरक्षा सिर्फ़ सरहदों की निगहबानी तक महदूद नहीं, बल्कि दूरदराज़ इलाक़ों में रहने वाले लोगों की सेहत, राहत और इज़्ज़त की हिफ़ाज़त भी उतनी ही ज़रूरी है। मेडिकल मदद और अवामी भलाई के ज़रिये सेना लगातार लोगों के दिलों में भरोसा और अपनापन पैदा कर रही है।

करनाह में आयोजित यह कैंसर स्क्रीनिंग और मल्टी-स्पेशियलिटी मेडिकल कैंप भारतीय सेना की इंसानियत, ख़िदमत और अवामी भलाई के जज़्बे का बेहतरीन नमूना है। यह पहल इस बात को भी साबित करती है कि जब सुरक्षा बल और सिविल प्रशासन मिलकर काम करते हैं, तो दूरदराज़ इलाक़ों के लोगों की ज़िंदगी में असली बदलाव लाया जा सकता है।

आज जब कश्मीर अमन, तरक़्क़ी और खुशहाली की तरफ़ आगे बढ़ रहा है, तब भारतीय सेना का इंसानी और सामाजिक किरदार और भी अहम बन जाता है। हर मेडिकल कैंप, राहत अभियान और अवामी मदद के ज़रिये भारतीय सेना सिर्फ़ सरहदों की निगहबान नहीं, बल्कि सच मायनों में “कश्मीर की लाइफ़ लाइन” बनकर उभर रही है।

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