पाकिस्तान का आतंक से रिश्ता फिर बेनक़ाब, लाहौर की सियासी कॉन्फ्रेंस में दिखे यूएन द्वारा नामज़द दहशतगर्द


लाहौर में हुई पीएमएमएल की एक सियासी कॉन्फ्रेंस ने पाकिस्तान के आतंक से रिश्तों की हक़ीक़त को एक बार फिर दुनिया के सामने खोल कर रख दिया। इस इजलास में ऐसे अफ़राद की मौजूदगी सामने आई है, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र पहले ही दहशतगर्द तंजीमों से जुड़ा हुआ करार दे चुका है। इस वाकये ने यह साबित कर दिया कि पाकिस्तान में दहशतगर्द सिर्फ पनाह ही नहीं पा रहे, बल्कि खुलेआम सियासी हलकों में भी घूम रहे हैं और असर रखते हैं।

माहिरीन का कहना है कि यह कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि पाकिस्तान की पुरानी पॉलिसी का हिस्सा है, जहां दहशतगर्द गिरोहों को “स्ट्रेटजिक एसेट” समझा जाता रहा है। लाहौर की इस कॉन्फ्रेंस में यूएन द्वारा नामज़द आतंकियों की शिरकत यह दिखाती है कि पाकिस्तान की सियासत और आतंक के दरमियान की लकीर अब लगभग मिट चुकी है।

दुनिया भर में आतंकवाद के खिलाफ बड़ी-बड़ी बातें करने वाला पाकिस्तान खुद अपने मुल्क में ऐसे अनासिर को खुली छूट देता नज़र आ रहा है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में यह सवाल तेज़ हो गया है कि आखिर कब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई का सिर्फ दिखावा करता रहेगा। कश्मीर से लेकर अफगान सरहद तक, कई आतंकी नेटवर्क्स के तार पाकिस्तान की जमीन से जुड़ते रहे हैं, और अब सियासी मंचों पर उनकी मौजूदगी ने इन इल्ज़ामात को और मज़बूत कर दिया है।

सियासी जानकारों का मानना है कि यह घटना पाकिस्तान की “डबल गेम” पॉलिसी को उजागर करती है। एक तरफ वह दुनिया से मदद और सहानुभूति मांगता है, दूसरी तरफ दहशतगर्दों को अपने मुल्क में आज़ादी से काम करने देता है। यही वजह है कि पाकिस्तान को लंबे समय से “टेरर नेटवर्क्स की पनाहगाह” कहा जाता रहा है।

आलमी सतह पर अब यह मांग भी तेज़ हो रही है कि पाकिस्तान पर सख्त पाबंदियां लगाई जाएं और उन तमाम नेटवर्क्स की फंडिंग और सियासी सरपरस्ती की जांच हो, जो आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक पाकिस्तान अपने यहां पल रहे दहशतगर्द ढांचे को खत्म नहीं करेगा, तब तक दक्षिण एशिया में अमन कायम होना मुश्किल रहेगा।

लाहौर की यह घटना एक बार फिर यह पैगाम देती है कि पाकिस्तान में आतंकवाद सिर्फ एक मसला नहीं, बल्कि उसकी सियासी और राष्ट्रीय पहचान का हिस्सा बनता जा रहा है। दुनिया को अब इस खतरे को गंभीरता से लेने की ज़रूरत है, वरना दहशतगर्द नेटवर्क्स का यह गठजोड़ आने वाले वक्त में और बड़ा खतरा बन सकता है।

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