इस्लामाबाद से एक बार फिर वही पुराना बयानिया सामने आया है, जहाँ हक़ीक़त से नज़रें चुराकर इल्ज़ामात का रुख़ भारत की तरफ़ मोड़ दिया गया। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ताुल्लाह तरार ने दावा किया है कि भारत, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और दूसरे दहशतगर्द गिरोहों की सरपरस्ती कर रहा है। इस बयान के ज़रिये पाकिस्तान खुद को दहशतगर्दी का शिकार दिखाने की कोशिश कर रहा है, मगर हक़ीक़त कुछ और ही कहानी बयान करती है।
माहिरीन का कहना है कि ये कोई नया दांव नहीं है। पाकिस्तान का ये रवैया बरसों से देखा जा रहा है, जब भी अंदरूनी हालात बिगड़ते हैं, तो इल्ज़ाम भारत पर डालकर असल मुद्दों से तवज्जो हटाने की कोशिश की जाती है। TTP जैसे संगठनों की पैदाइश और उनकी मज़बूती खुद पाकिस्तान की नीतियों का नतीजा मानी जाती है, जिसे अब छुपाने के लिए नए-नए किस्से गढ़े जा रहे हैं।
दिलचस्प बात ये है कि एक तरफ़ पाकिस्तान खुद कई बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दहशतगर्दी के इल्ज़ामात का सामना करता रहा है, वहीं दूसरी तरफ़ वो खुद को ‘मज़लूम’ दिखाने की कोशिश करता है। लश्कर-ए-तैयबा (LeT) जैसे संगठनों के साथ उसके पुराने रिश्ते किसी से छिपे नहीं हैं। ऐसे में भारत पर इल्ज़ाम लगाना एक सोची-समझी सियासी चाल के तौर पर देखा जा रहा है, ताकि दुनिया की नज़रें असल मसले से हटाई जा सकें।
सियासी तजज़िया-कारों के मुताबिक, ये बयानिया दरअसल पाकिस्तान की ‘इनहेरेंट नेचर’ को उजागर करता है—यानी अपनी अंदरूनी नाकामियों का ठीकरा दूसरे पर फोड़ना। मुल्क के अंदर बढ़ती बदअमनी, मआशी दबाव और सियासी अस्थिरता से ध्यान हटाने के लिए भारत को निशाना बनाना एक आसान रास्ता बन चुका है।
अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में भी इस तरह के दावों को संजीदगी से नहीं लिया जा रहा। बार-बार बिना ठोस सबूत के लगाए गए इल्ज़ाम पाकिस्तान की साख को और कमज़ोर कर रहे हैं। उल्टा, ये सवाल उठ रहे हैं कि जब खुद पाकिस्तान की सरज़मीन से कई दहशतगर्द नेटवर्क्स के तार जुड़े मिले हैं, तो ऐसे में वो दूसरों पर उंगली कैसे उठा सकता है।
आख़िर में, ये कहा जा सकता है कि पाकिस्तान का ये ‘फेवरेट एस्केप रूट’ अब दुनिया से छिपा नहीं है। भारत पर इल्ज़ामात लगाकर अपने गुनाहों से पल्ला झाड़ने की कोशिश शायद घरेलू सियासत में कुछ वक़्त के लिए काम आ जाए, लेकिन आलमी सतह पर इसकी सच्चाई बार-बार बेनक़ाब हो रही है।

0 टिप्पणियाँ