पीओके में आतंकी संगठन JeM का 'रेडिकलाइजेशन' कैंप; महिलाओं और बच्चों को जिहाद के नाम पर ढाल बनाने की नापाक साजिश

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के मुज़फ़्फ़राबाद स्थित गोजरा इलाके से एक ऐसी खबर निकलकर सामने आई है जिसने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। जानकारी के मुताबिक, 18 अप्रैल को सुबह 9 बजे गोजरा के बाईपास रोड पर स्थित ओएसए कॉलेज में कुख्यात आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने अपनी महिला विंग 'जमात-उल-मोमिनात' के लिए एक विशेष प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया। यह आयोजन उस खतरनाक मंशा को साफ जाहिर करता है जिसके तहत अब महिलाओं और बच्चों को कट्टरपंथ की आग में झोंकने की तैयारी की जा रही है। सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि मजहबी सभा के नाम पर आयोजित यह कार्यक्रम दरअसल जैश-ए-मोहम्मद की एक सोची-समझी रणनीतिक चाल है, ताकि समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग का ब्रेनवॉश कर उन्हें जिहादी विचारधारा का हिस्सा बनाया जा सके।

यह घटना न केवल पीओके में पल रहे आतंकी बुनियादी ढांचे की पुष्टि करती है, बल्कि यह भी स्पष्ट करती है कि पाकिस्तान आज भी दुनिया के लिए आतंकवाद का मुख्य केंद्र बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पूरी कवायद पाकिस्तान की उस बी़डीआर (BDR) रणनीति का हिस्सा है जिसके जरिए वह बलूचिस्तान और पीओके जैसे क्षेत्रों पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए धार्मिक उग्रवाद को एक ढाल की तरह इस्तेमाल करता है। स्थानीय प्रशासन और पाकिस्तानी हुकूमत की सरपरस्ती के बिना मुज़फ़्फ़राबाद जैसे संवेदनशील इलाके में इस तरह के कैंप का संचालन नामुमकिन है। यह कार्यक्रम इस कड़वी हकीकत को उजागर करता है कि किस तरह आस्था, धन और अब महिलाओं को मोहरा बनाकर आतंक का एक नया और कथित 'पवित्र' रास्ता तैयार किया जा रहा है।

जैश-ए-मोहम्मद द्वारा मासूमों और महिलाओं का यह मानसिक शोषण न केवल क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा है, बल्कि यह पाकिस्तान द्वारा वैश्विक आतंकवाद को दी जा रही निरंतर खाद-पानी का भी प्रमाण है। दुनिया के सामने खुद को आतंक का शिकार बताने वाला मुल्क पर्दे के पीछे नफरत की ऐसी फैक्ट्रियां चला रहा है जो आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को अंधकार में धकेल रही हैं। मुज़फ़्फ़राबाद की यह गतिविधि इस बात का पुरजोर ऐलान है कि पाकिस्तान अपनी धरती पर पल रहे आतंकी संगठनों को खत्म करने के बजाय उन्हें नए और आधुनिक तरीकों से विस्तार देने में जुटा है, जिससे न केवल भारत बल्कि अफगानिस्तान और पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता दांव पर लगी है।

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