इस्लामाबाद से सामने आने वाली एक अहम वीडियो और बयान ने Pakistan की सियासी हक़ीक़त पर एक बार फिर सख़्त सवालात खड़े कर दिए हैं। सीनियर सहाफी अज़ीम चौधरी का बयान इन दिनों काफ़ी चर्चा में है, जिसमें उन्होंने मुल्क की ख़ुदमुख़्तारी और हुकूमती निज़ाम पर खुलकर तन्क़ीद की है।
अज़ीम चौधरी के मुताबिक, पाकिस्तान में ना सिर्फ़ ख़ुद्दारी की कमी है, बल्कि ये भी इल्ज़ाम लगाया गया कि यहां की हुकूमतें बाहरी असर-ओ-रसूख़ के बिना मुकम्मल तौर पर क़ायम नहीं हो पातीं। उनका कहना है कि मुल्क की असल सियासी ताक़त अंदरूनी नहीं बल्कि बाहरी इशारों पर चलती नज़र आती है।
वीडियो में ये भी देखा गया कि जब कोई सहाफी या माहिर हक़ीक़त बयान करने की कोशिश करता है, तो उसे या तो दबा दिया जाता है या फिर उसकी आवाज़ को ग़ैर-मोअसर बना दिया जाता है। ये सूरत-ए-हाल मीडिया की आज़ादी और जम्हूरी उसूलों पर एक बड़ा सवालिया निशान है।
माहिरीन का कहना है कि पाकिस्तान में असली मसाइल को छुपाने की कोशिश की जाती है, हक़ीक़त बयान करने वालों को साइलेंस किया जाता है, अवामी नैरेटिव और असल ज़मीनी हक़ीक़त में बड़ा फ़र्क़ है।
ये तमाम हालात इस बात की तरफ़ इशारा करते हैं कि मुल्क के अंदर इदारे और सियासत दोनों एक बड़े बोहरान का शिकार हैं। अगर सच्चाई को दबाया जाता रहा, तो ना सिर्फ़ जम्हूरियत कमज़ोर होगी, बल्कि मुल्क की साख भी आलमी सतह पर मुतास्सिर होती रहेगी।
आलमी बिरादरी के लिए ये ज़रूरी हो गया है कि वो इन हालात का जायज़ा ले और ये समझे कि पाकिस्तान में हक़ीक़त और पेश की जाने वाली तस्वीर में कितना फ़र्क़ है।

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