रिपोर्ट के अनुसार, ये तंजीम इंटरनेशनल बॉर्डर के साथ ड्रोन के ज़रिए सोने की खेप गिराने की साज़िश रच रही है। इस सोने को बाद में ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGWs) के ज़रिए अंदरूनी इलाकों तक पहुंचाया जाएगा, जिससे दहशतगर्दी की फंडिंग को मज़बूत किया जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि सोने की तस्करी को एक “खामोश फंडिंग नेटवर्क” के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है, क्योंकि सुरक्षा बलों की सख्ती की वजह से नशीले पदार्थों की तस्करी के रास्तों पर कड़ी निगरानी है। ऐसे में दहशतगर्द अब नए तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
खुफ़िया इनपुट्स में ये भी सामने आया है कि घुसपैठ करने वाले दहशतगर्द भारी हथियारों से लैस हो सकते हैं, जिनमें ग्रेनेड्स, असलहे और एंटी-पर्सनल (AP) माइंस यानी बारूदी सुरंगें शामिल हैं। उनका मंसूबा डोडा–किश्तवाड़–रामबन (DKR) बेल्ट की तरफ़ बढ़ने का बताया जा रहा है, जहां बड़े हमलों की साज़िश हो सकती है।
रिपोर्ट में यह भी इशारा किया गया है कि सांबा सेक्टर के अलावा अरनिया, नौशेरा, पुंछ और कुपवाड़ा सेक्टर्स में भी घुसपैठ की कोशिशें तेज़ हो सकती हैं। सुरक्षा एजेंसियां इन इनपुट्स को बेहद गंभीरता से लेते हुए सरहदी इलाकों में चौकसी बढ़ा चुकी हैं और हर संदिग्ध हरकत पर कड़ी नज़र रखी जा रही है।
माहिरीन का मानना है कि इस तरह की साज़िशें क्षेत्र में डर और अस्थिरता फैलाने की कोशिश हैं, लेकिन भारतीय सुरक्षा बल पूरी तरह सतर्क हैं और हर चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार हैं।

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