जम्मू-कश्मीर में 3 वर्षों में 280 आतंकवाद संबंधी घटनाएं देखी गईं: गृह मंत्रालय'

'पिछले 2 वर्षों के दौरान आतंकवादी हिंसा, घुसपैठ की घटनाओं में कमी आई


श्रीनगर, 1 अगस्त: गृह मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर में पिछले 3 वर्षों के दौरान लगभग 280 आतंकवाद से संबंधित घटनाएं देखी गईं तथा पिछले दो वर्षों के दौरान आतंकवादी हिंसा तथा घुसपैठ की घटनाओं में गिरावट आई है। गृह मंत्रालय राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने यह बात कही।उन्होंने कहा कि 2021 में लगभग 129 आतंकवादी संबंधी घटनाएं देखी गईं, जबकि 2022 में ऐसी 125 घटनाएं देखी गईं तथा 2023 में 26 घटनाएं देखी गईं।

गृह राज्य मंत्री ने कहा कि 2021 तथा 2022 में 34  तथा 14 घुसपैठ देखी गईं, जबकि इस साल जून के अंत तक कोई घुसपैठ की सूचना नहीं मिली। सरकार की आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति है तथा जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति में काफी सुधार हुआ है। कानून की प्रासंगिक धाराओं के तहत आतंकवादियों तथा उनके सहयोगियों से संबंधित संपत्तियों की कुर्की, वास्तविक समय के आधार पर सभी सुरक्षा बलों के बीच खुफिया जानकारी साझा करना तथा जम्मू-कश्मीर में किसी भी आतंकवादी घटना को विफल करने के लिए गहन घेराबंदी तथा तलाशी अभियान चलाया जाता है। गृह राज्य मंत्री ने कहा।

उन्होंने कहा कि केंद्र ने सीमा पार से घुसपैठ से निपटने के लिए एक समन्वित तथा बहुआयामी रणनीति अपनाई है। इसमें अंतर्राष्ट्रीय सीमा (आईबी), नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर बलों की सामरिक तैनाती, निगरानी कैमरे, नाइट विजन कैमरे, हीट सेंसिंग गैजेट्स, आईबी तथा एलओसी पर बहु-स्तरीय तैनाती तथा सीमा बाड़ लगाने जैसी तकनीक का उपयोग शामिल है।

उन्होंने कहा कि घुसपैठ तथा  घात पर अग्रिम तथा लक्ष्य-उन्मुख इनपुट एकत्र करने के लिए खुफिया कर्मियों को तैनात किया जाता है। उन्होंने कहा भारतीय सेना या सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) द्वारा पैदल गश्त तथा  सीमा पुलिस चौकियों की स्थापना से स्थानीय खुफिया जानकारी उत्पन्न करने में मदद मिलती है तथा घुसपैठियों के खिलाफ अन्य सक्रिय कार्रवाई की जाती है।

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