झांगर और लाम इलाकों में 21 और 22 अगस्त को बैक-टू-बैक घुसपैठ की कोशिशों के परिणामस्वरूप दो आतंकवादी मारे गए और एक कुख्यात आतंकवादी गाइड की गिरफ्तारी हुई, जिसे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा नेतृत्व करने का काम सौंपा गया था। सेना के 80 इन्फैंट्री ब्रिगेड कमांडर ब्रिगेडियर कपिल राणा ने कहा कि सेना की चौकी पर हमला करने के लिए इस तरफ समूहो में घुसपैठ की कोशिस कर रहे है।
उन्होंने कहा कि यह घुसपैठ हमारी पश्चिमी सीमाओं के पार हमारे दुशमनों की ओर सीधा संकेत है जो राजौरी और जम्मू क्षेत्र में शांति भंग करने की भयावह कोशिश में लगे हुए है।
हालांकि, उन्होंने कहा कि नियंत्रण रेखा पर तैनात सुरक्षा बल विरोधी के किसी भी नापाक मंसूबों को कामयाब नहीं होने देंगे, तथा जम्मू क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए हम पूरी तरह से सतर्क हैं।
राजौरी के नौशेरा सेक्टर में दो सफल अभियानों के बारे में मीडिया को जानकारी देते हुए, अधिकारी ने कहा कि पहला प्रयास 21 अगस्त को किया गया था जब झंगर में तैनात सतर्क सैनिकों ने तड़के नियंत्रण रेखा के पार से दो से तीन आतंकवादियों की आवाजाही देखी।
एक आतंकवादी भारतीय चौकी के करीब आया और सतर्क संतरियों द्वारा चुनौती दिए जाने पर बाड़ को काटने की कोशिश की।
हालांकि, भागने की कोशिश कर रहे आतंकवादी को प्रभावी गोलाबारी से मार गिराया गया, जिससे वह अक्षम हो गया। पीछे छिपे दो आतंकवादी घने जंगल की आड़ में इलाके से भाग गए। एक घायल पाकिस्तानी आतंकवादी को जिंदा पकड़ लिया गया और तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान की गई।
ब्रिगेडियर राणा ने कहा कि पकड़े गए आतंकवादी ने पीओके में कोटी के सब्ज़कोट गांव के तबारक हुसैन के रूप में अपनी पहचान बताई।
आगे की पूछताछ में, आतंकवादी ने भारतीय सेना पोस्ट पर हमला करने की अपनी योजना को स्वीकार किया। हुसैन ने खुलासा किया कि उन्हें कर्नल यूनुस चौधरी नामक पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के एक कर्नल ने भेजा था, जिन्होंने उसे इस काम के लिए 30,000 रुपये (पाकिस्तानी मुद्रा) दिए थे।
हुसैन ने यह भी खुलासा किया कि उसने अन्य आतंकवादियों के साथ भारतीय अग्रिम चौकियों को निशाना बनाने के लिए घुसपैठ की थी। ब्रिगेडियर ने कहा कि भारतीय चौकी को निशाना बनाने की अनुमति पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी के कर्नल चौधरी ने 21 अगस्त को दी थी।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति को पहले 2016 में उसी सेक्टर से उसके भाई हारून अली के साथ सेना द्वारा पकड़ा गया था और नवंबर 2017 में मानवीय आधार पर वापस कर दिया गया था।
दूसरे ऑपरेशन में, 22 और 23 अगस्त की रात को, अधिकारी ने कहा कि दो से तीन आतंकवादियों के एक समूह ने लाम इलाके में घुसपैठ करने की कोशिश की। हमारे सतर्क सैनिको की नजर एलओसी पार करते हुए आतंकवादियों पर पड़ी, वे उनकी गतिविधियों पर नजर बनाये रख रहे थे।
उन्होंने कहा कि जैसे ही वे हमारे क्षेत्र में दाखिल हुए, सेना की एक सक्रिय टुकड़ी ने उन्हें ढेर कर दिया। इस ऑप्रेशन में दो आतंकवादी मरे गए। उन्होंने कहा कि तीसरा आतंकवादी संभवत: घायल हो गया है तथा खराब मौसम और घने पत्ते का फायदा उठाकर वापस चला गया है।
ब्रिगेडियर राणा ने कहा, 23 अगस्त की सुबह इलाके में एक ड्रोन उड़ाया गया जिसमे दो मृत आतंकवादियों के शव देखे गए। अधिकारी ने कहा कि 48 घंटे की भीतर में घुसपैठ की दो कोशिशों को नाकाम करना सशस्त्र बलों के लिए एक बड़ी सफलता है।
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