पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में 84वें दिन भी विरोध जारी, 29 अगस्त को नए प्रदर्शन का ऐलान

 


पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में कथित सुरक्षा बलों की कार्रवाई के खिलाफ चल रहा विरोध आंदोलन लगातार जारी रहने का दावा किया गया है। JAAC से जुड़े एक पोस्ट के मुताबिक, क्षेत्र में विरोध प्रदर्शनों को अब 84 दिन पूरे हो चुके हैं। आंदोलन से जुड़े लोगों ने एक बार फिर प्रदर्शन का आह्वान किया है, जिसके तहत 29 अगस्त को पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में और 30 अगस्त को बर्मिंघम तथा इटली में प्रदर्शन किए जाने की घोषणा की गई है।

JAAC से जुड़े पोस्ट में कहा गया है कि क्षेत्र में लोगों की तरफ से सुरक्षा बलों की कथित कार्रवाई और उससे जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध लगातार जारी है। आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी मांगों और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

84 दिनों से जारी विरोध का दावा इस बात की तरफ इशारा करता है कि पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में असंतोष केवल कुछ दिनों तक सीमित रहने वाला मामला नहीं रहा है। लगातार प्रदर्शन और नए कार्यक्रमों की घोषणा से यह संकेत मिलता है कि आंदोलन से जुड़े समूह अपनी मांगों को सार्वजनिक मंचों पर बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। क्षेत्र में होने वाले प्रदर्शनों के साथ अब प्रवासी समुदाय भी इस मुद्दे को विदेशों में उठाने की तैयारी कर रहा है।

29 अगस्त के प्रस्तावित प्रदर्शनों को लेकर आंदोलन से जुड़े लोगों की तरफ से स्थानीय स्तर पर लामबंदी की बात कही गई है। इसके अगले दिन यानी 30 अगस्त को बर्मिंघम और इटली में प्रदर्शन आयोजित करने का आह्वान किया गया है। इससे यह भी पता चलता है कि पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दे अब स्थानीय सीमाओं से बाहर प्रवासी समुदाय के बीच भी चर्चा का विषय बने हुए हैं।

बर्मिंघम में बड़ी संख्या में दक्षिण एशियाई प्रवासी आबादी रहती है और पहले भी पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन देखने को मिले हैं। इटली में प्रस्तावित कार्यक्रम भी इसी व्यापक प्रवासी सक्रियता का हिस्सा बताया जा रहा है। ऐसे कार्यक्रमों के जरिए आंदोलन से जुड़े समूह अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान क्षेत्र की स्थिति की तरफ खींचने की कोशिश कर रहे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम का एक अहम पहलू अंतरराष्ट्रीय ध्यान है। जब किसी क्षेत्र से जुड़े विरोध प्रदर्शन स्थानीय स्तर से निकलकर विदेशों में रहने वाले समुदायों तक पहुंचते हैं, तो उससे संबंधित मुद्दे अंतरराष्ट्रीय मीडिया और मानवाधिकार संगठनों की नजर में भी आ सकते हैं। JAAC से जुड़े पोस्ट में स्थानीय विरोध और प्रवासी प्रदर्शन दोनों को एक ही आंदोलन की निरंतरता के रूप में पेश किया गया है।

84 दिनों से जारी विरोध और आने वाले दिनों में पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ बर्मिंघम और इटली में प्रस्तावित प्रदर्शनों से साफ है कि यह अधिकार आंदोलन स्थानीय स्तर के साथ-साथ प्रवासी समुदाय के बीच भी सक्रिय बना हुआ है। इससे क्षेत्र की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान बनाए रखने की आंदोलनकारियों की कोशिश भी सामने आती है।


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