बलूचिस्तान में सरकार के खिलाफ 11 दल एकजुट, 19 नवंबर को बंद का ऐलान


पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बिगड़ती कानून-व्यवस्था और सुरक्षा हालात को लेकर राजनीतिक विरोध तेज होता दिखाई दे रहा है। क्वेटा में अवामी नेशनल पार्टी (ANP) की ओर से आयोजित एक सम्मेलन में 11 राजनीतिक दलों ने हिस्सा लेकर प्रांत की मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता जताई। बैठक में बढ़ती असुरक्षा, नागरिकों की सुरक्षा और शासन व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए।

सम्मेलन के दौरान अवामी नेशनल पार्टी के नेता असगर खान अचकजई ने पाकिस्तानी प्रशासन की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि सरकार बलूचिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और आम नागरिकों की हिफाजत करने में नाकाम रही है। उन्होंने प्रांत में बढ़ती अस्थिरता और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों पर चिंता व्यक्त की।

सम्मेलन में शामिल दलों ने कथित तौर पर पूर्व अफगान सुरक्षा कर्मियों की बलूचिस्तान में मौजूदगी और सशस्त्र समूहों की गतिविधियों को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि ऐसी परिस्थितियां स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा और प्रांत में शांति व्यवस्था के लिए चुनौती बन रही हैं। हालांकि, पूर्व अफगान कर्मियों की मौजूदगी से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

राजनीतिक दलों ने संयुक्त घोषणा में आतंकवाद, उग्रवाद, लक्षित हत्याओं, फिरौती के लिए अपहरण और राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रियों एवं परिवहन चालकों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। इसके अलावा लापता व्यक्तियों का मामला, बेरोजगारी, महंगाई और आर्थिक गतिविधियों में गिरावट जैसे विषय भी चर्चा का हिस्सा रहे। अफगानिस्तान और ईरान के साथ व्यापारिक मार्गों में रुकावट तथा बिजली और गैस की लंबी कटौती को भी प्रांत की आर्थिक परेशानियों से जोड़ा गया।

इन समस्याओं के विरोध में 11 राजनीतिक दलों ने 19 नवंबर 2026 को पूरे बलूचिस्तान में शटर डाउन हड़ताल और जिला मुख्यालयों में विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। इसके बाद 26 नवंबर को राजनीतिक दलों के प्रांतीय नेतृत्व की एक और बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें आंदोलन की अगली रणनीति पर विचार किया जाएगा। दिसंबर के पहले सप्ताह में केंद्रीय नेतृत्व का एक अन्य सर्वदलीय सम्मेलन बुलाने की भी योजना है।

बलूचिस्तान की मौजूदा स्थिति पाकिस्तान की शासन व्यवस्था और सुरक्षा नीतियों के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। जब एक ही प्रांत के 11 राजनीतिक दल कानून-व्यवस्था, नागरिक सुरक्षा और आर्थिक बदहाली जैसे मुद्दों पर एक साथ आवाज उठाते हैं, तो यह वहां की समस्याओं की गंभीरता को दर्शाता है।

किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार बुनियादी महत्व रखता है। बलूचिस्तान में राजनीतिक दलों की यह एकजुटता दिखाती है कि अब प्रांत के विभिन्न राजनीतिक समूह सुरक्षा और शासन से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

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