पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, ये तीनों अभियान खानू बाबागुंड, वानीगाम क्रॉसिंग और वटयेन इलाके में चलाए गए। पहली कार्रवाई थाना क्रालगुंड की पुलिस टीम ने खानू बाबागुंड में नाका चेकिंग के दौरान की। यहां 2 संदिग्ध व्यक्तियों को पकड़ा गया। उनकी पहचान तरथपोरा निवासी आबिद हुसैन मीर और खानू निवासी रऊफ मुश्ताक भट के रूप में बताई गई है। तलाशी के दौरान उनके कब्जे से चरस जैसी सामग्री और चरस पाउडर जैसा पदार्थ बरामद किया गया। इस मामले में थाना क्रालगुंड में एनडीपीएस अधिनियम के तहत एफआईआर संख्या 78/2026 दर्ज की गई।
दूसरी कार्रवाई वानीगाम क्रॉसिंग पर हुई, जहां पुलिस ने बुद्रा बाला निवासी दानिश परवेज पर्रा को हिरासत में लिया। उसके कब्जे से भांग (खशखश) जैसा पदार्थ बरामद होने की जानकारी दी गई। इस सिलसिले में एफआईआर संख्या 79/2026 दर्ज की गई।
इसी तरह तीसरी कार्रवाई वटयेन इलाके में पुलिस पोस्ट चोगुल की टीम ने नाका चेकिंग के दौरान की। इस दौरान सोपोर से कुपवाड़ा की तरफ जा रही एक मोटरसाइकिल को जांच के लिए रोका गया। मोटरसाइकिल पर सवार बिहार निवासी मोहम्मद जहांगीर सदीकी और मोहम्मद हसीमुद्दीन को पकड़ा गया। पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान चरस जैसा पदार्थ बरामद हुआ। इस मामले में थाना हंदवाड़ा में एफआईआर संख्या 275/2026 दर्ज की गई। इस तरह तीन अलग-अलग कार्रवाइयों में कुल 5 संदिग्ध व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया और एनडीपीएस अधिनियम के तहत 3 मामले दर्ज हुए।
हंदवाड़ा में हुई ये कार्रवाइयां इस बात को सामने लाती हैं कि नशे के अवैध कारोबार पर रोक लगाने के लिए कानून लागू करने वाली एजेंसियां लगातार प्रयास कर रही हैं। ऐसे अभियान नशे की सप्लाई करने वाले संदिग्ध नेटवर्क की पहचान करने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने में अहम भूमिका निभाते हैं। हालांकि, इन मामलों में जांच और कानूनी प्रक्रिया का पूरा होना भी जरूरी है।
लेकिन एक बात हमें समझनी होगी कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस या सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें हर मां-बाप, शिक्षक, पंचायत प्रतिनिधि, युवा क्लब और सामाजिक संगठन का अपना अहम किरदार है। अगर किसी इलाके में नशे से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी मिलती है, तो लोगों को कानून अपने हाथ में लेने के बजाय पुलिस को विश्वसनीय सूचना देनी चाहिए।
नशा मुक्ति अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए खेल प्रतियोगिताएं, जागरूकता बैठकें, स्कूलों में संवाद और युवाओं के लिए हुनरमंदी के कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं। नशे की लत से प्रभावित किसी व्यक्ति को तिरस्कार नहीं, बल्कि इलाज, काउंसलिंग और परिवार के सहयोग की जरूरत होती है।
कश्मीर के नौजवानों से हमारी यही गुजारिश है कि वे अपनी जिंदगी की कीमत पहचानें। अपनी ऊर्जा शिक्षा, खेल, रोजगार और समाज की बेहतरी में लगाएं। सुरक्षा बलों और पुलिस के प्रयासों के साथ आम लोगों की भागीदारी जुड़ जाए, तो नशे के खिलाफ यह लड़ाई और मजबूत हो सकती है।
आइए, मिलकर ऐसा कश्मीर बनाएं जहां युवाओं के हाथों में नशा नहीं, बल्कि किताबें, हुनर और कामयाबी का परचम हो।


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