सोपोर की सानिया ने हुनर और मेहनत से बुनी आत्मनिर्भरता की नई कहानी


कश्मीर के सोपोर की रहने वाली सानिया निसार ने घर की चारदीवारी में सीखे एक छोटे से हुनर को कारोबार और आत्मनिर्भरता की राह में तब्दील कर एक नई मिसाल कायम की है। अपनी मां से क्रोशिया का हुनर सीखने वाली सानिया ने इसी पारंपरिक कारीगरी को आगे बढ़ाते हुए अपना हस्तनिर्मित ब्रांड ‘नॉट्स एंड स्टिचेज़’ शुरू किया है। आज उनके हाथों से तैयार होने वाले क्रोशिया उत्पाद सोशल मीडिया के ज़रिए ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं और उनका छोटा-सा घरेलू काम धीरे-धीरे एक कारोबारी पहचान हासिल कर रहा है।

सानिया का सफर इस बात की मिसाल है कि अगर हुनर को सही दिशा, मेहनत और कारोबारी सोच के साथ जोड़ा जाए तो घर में सीखी गई कारीगरी भी रोज़गार का ज़रिया बन सकती है। ‘नॉट्स एंड स्टिचेज़’ के तहत वह क्रोशिया से तैयार किए गए अलग-अलग उत्पाद पेश करती हैं, जिनमें खूबसूरत फूलों के गुलदस्ते, क्रोशिया फूल, पाउच, टोट बैग, हैंडबैग और की-चेन शामिल हैं। इन उत्पादों की खासियत यह है कि इनमें मशीन से तैयार सामान के बजाय हाथ की मेहनत और रचनात्मकता की झलक दिखाई देती है। सानिया अपने उत्पादों को इंस्टाग्राम के माध्यम से ग्राहकों तक पहुंचा रही हैं, जिससे स्थानीय हुनर को डिजिटल बाज़ार से जोड़ने का एक नया रास्ता खुला है।

एक कारोबारी कार्यक्रम के दौरान सानिया ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस काम ने उन्हें आत्मनिर्भरता और अपने फैसले खुद लेने का हौसला दिया। उनके लिए क्रोशिया महज़ एक शौक या घरेलू गतिविधि नहीं रहा, बल्कि यह उनकी आर्थिक स्वतंत्रता का ज़रिया बन गया है। उन्होंने युवा महिलाओं को भी यह संदेश दिया कि उन्हें अपनी क्षमताओं और हुनर पर भरोसा करते हुए अपने लिए रास्ते तलाशने चाहिए और अपने सपनों को अपनी शर्तों पर आगे बढ़ाना चाहिए। उनका यह संदेश खास तौर पर उन युवतियों के लिए अहम है जो हुनर तो रखती हैं, लेकिन उसे कारोबार में बदलने के लिए शुरुआती कदम उठाने में झिझक महसूस करती हैं।

सानिया अब अपने कारोबार को अगले मुकाम तक ले जाने की तैयारी में हैं। वह अपने उत्पादों को अमेज़न पर सूचीबद्ध करने की योजना बना रही हैं, जिससे ‘नॉट्स एंड स्टिचेज़’ के हस्तनिर्मित उत्पाद स्थानीय ग्राहकों से आगे बड़े ऑनलाइन बाज़ार तक पहुंच सकें। अगर यह विस्तार योजना अमल में आती है तो सोपोर में घर से शुरू हुआ यह छोटा कारोबार डिजिटल कॉमर्स के ज़रिए देश के दूसरे हिस्सों तक भी पहुंच बना सकता है। इससे न सिर्फ सानिया के कारोबार का दायरा बढ़ेगा, बल्कि कश्मीर की हस्तनिर्मित कारीगरी को नए ग्राहकों और बाज़ारों से जोड़ने का अवसर भी मिलेगा।

सानिया की कहानी उत्तरी कश्मीर की उस बदलती तस्वीर को सामने लाती है जहां युवा अब अपनी पहचान केवल पारंपरिक रोज़गार के साधनों तक सीमित नहीं रख रहे, बल्कि सोशल मीडिया, ई-कॉमर्स और रचनात्मक हुनर को मिलाकर नए कारोबारी रास्ते तलाश रहे हैं। खास तौर पर महिलाओं के लिए घर से शुरू होने वाले ऐसे छोटे उद्यम आर्थिक आत्मनिर्भरता की बुनियाद तैयार कर सकते हैं। क्रोशिया जैसे पारंपरिक हुनर को आधुनिक डिज़ाइन और डिजिटल बिक्री से जोड़ना स्थानीय कारीगरी को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी एक प्रभावी ज़रिया बन सकता है।

सोपोर की सानिया निसार का ‘नॉट्स एंड स्टिचेज़’ इसी बदलते मंजर की एक तस्वीर है। मां से सीखा गया हुनर आज उनके लिए कारोबार, रचनात्मकता और आत्मनिर्भरता का साधन बन चुका है। उनकी कोशिश यह भी दिखाती है कि कश्मीर की बेटियां अपने हुनर को घर की सीमाओं से निकालकर डिजिटल दुनिया और बड़े बाज़ार तक ले जाने की सलाहियत रखती हैं। हुनर, मेहनत और नई कारोबारी सोच के इस मेल से न सिर्फ व्यक्तिगत कामयाबी की राह बनती है, बल्कि वादी में महिला उद्यमिता और स्थानीय कारीगरी के लिए नए इमकान भी पैदा होते हैं।

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