कुपवाड़ा ज़िले का करनाह इलाक़ा अपनी दुर्गम भौगोलिक स्थिति और सरहदी हालात के कारण लंबे समय से विशेष परिस्थितियों वाला क्षेत्र रहा है। ऐसे में यहां स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ाना स्थानीय आबादी के लिए अहम माना जाता है। सेना प्रमुख के दौरे ने इस बात को भी रेखांकित किया कि सरहद से जुड़े इलाक़ों में चिकित्सा सहायता और पूर्व सैनिकों के साथ निरंतर संपर्क को प्राथमिकता दी जा रही है।
दौरे के दौरान जनरल धीरज सेठ ने क्षेत्र के पूर्व सैनिकों और बुजुर्ग सैन्यकर्मियों से मुलाकात की। बातचीत के दौरान उन्होंने उनके अनुभवों और क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को जाना। पूर्व सैनिकों के साथ इस तरह का सीधा संपर्क सेना और उसके पूर्व सदस्यों के बीच कायम रिश्तों को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम माना जाता है। मुलाकात के दौरान पूर्व सैनिकों ने भी सेना प्रमुख के साथ अपने अनुभव साझा किए।
इसके बाद सेना प्रमुख ने तंगधार स्थित एफएससी में चल रहे मेगा नेत्र एवं मोतियाबिंद शल्य चिकित्सा शिविर का निरीक्षण किया। ऑपरेशन दृष्टि के तहत आयोजित इस स्वास्थ्य पहल का मकसद दूरदराज़ और सरहदी इलाक़ों में रहने वाले लोगों को आंखों की जांच तथा आवश्यक उपचार की सुविधा उपलब्ध कराना है। ऐसे इलाक़ों में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं तक पहुंच कई बार भौगोलिक दूरी और सीमित संसाधनों के कारण मुश्किल होती है।
नेत्र संबंधी बीमारियों, विशेषकर मोतियाबिंद, का समय पर इलाज लोगों के रोज़मर्रा के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है। आंखों की जांच से बीमारी की पहचान शुरुआती दौर में होने के साथ जरूरतमंद मरीजों को आगे के उपचार की सुविधा मिल सकती है। तंगधार जैसे सरहदी क्षेत्र में इस तरह का शिविर स्थानीय लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
भारतीय सेना की ओर से जम्मू-कश्मीर के दूरदराज़ इलाक़ों में समय-समय पर स्वास्थ्य एवं जनकल्याण से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की जाती रही हैं। करनाह में सेना प्रमुख का दौरा इसी व्यापक संपर्क और सेवा-आधारित प्रयासों की कड़ी के रूप में सामने आया है। एक तरफ पूर्व सैनिकों से मुलाकात के ज़रिये उनके साथ जुड़ाव को अहमियत दी गई, वहीं दूसरी तरफ आंखों के इलाज से जुड़े शिविर का जायजा लेकर स्थानीय स्वास्थ्य जरूरतों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
करनाह के लोगों के लिए इस तरह की पहल सिर्फ चिकित्सा सुविधा तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सरहदी इलाक़े और देश के बाकी हिस्सों के बीच भरोसे और संपर्क की डोर को भी मजबूत करने में मदद करती है। सेना प्रमुख का दौरा इसी मानवीय संपर्क, पूर्व सैनिकों के सम्मान और दूरदराज़ आबादी तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की प्रतिबद्धता को सामने लाता है।


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