बरामूला के दानिश रमज़ान ने राष्ट्रीय फाइटिंग चैंपियनशिप में जीता स्वर्ण पदक


कश्मीर के बरामूला जिले के नरवाव इलाके से ताल्लुक रखने वाले युवा फाइटर दानिश रमज़ान ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का शानदार मुज़ाहिरा करते हुए वीईएसडब्ल्यूए फाइटिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल किया है। हरियाणा के गुरुग्राम में आयोजित इस प्रतियोगिता में दानिश ने 60 किलोग्राम भार वर्ग में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया और अपने इलाके के साथ-साथ पूरे कश्मीर का नाम रोशन किया।

चैंपियनशिप में देश के अलग-अलग हिस्सों से करीब 200 से 250 फाइटरों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में अफगानिस्तान से आए कुछ खिलाड़ियों की भागीदारी ने भी मुकाबलों को अंतरराष्ट्रीय रंग दिया। ऐसे कड़े मुकाबलों के बीच दानिश का स्वर्ण पदक हासिल करना उनकी मेहनत, अनुशासन और खेल के प्रति लगन को दर्शाता है।

दानिश रमज़ान की इस कामयाबी की खबर नरवाव और आसपास के इलाकों में पहुंचते ही खुशी की लहर दौड़ गई। स्थानीय लोगों ने उनकी जीत पर मुबारकबाद पेश करते हुए कहा कि दानिश ने अपनी मेहनत के बल पर इलाके के युवाओं के लिए एक नई मिसाल कायम की है। लोगों का कहना है कि कश्मीर के दूरदराज इलाकों में भी खेलों को लेकर नौजवानों में काफी जोश और काबिलियत मौजूद है, जरूरत सिर्फ उन्हें सही मंच और लगातार प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की है।

बरामूला लंबे समय से विभिन्न खेलों में उभरती प्रतिभाओं का घर रहा है। क्रिकेट, फुटबॉल, वुशू, मुक्केबाजी और दूसरे मुकाबला आधारित खेलों के साथ अब फाइटिंग स्पोर्ट्स में भी जिले के नौजवान अपनी पहचान बना रहे हैं। दानिश की उपलब्धि इसी सिलसिले की एक अहम कड़ी मानी जा रही है।

मुकाबला आधारित खेलों में खिलाड़ी को केवल शारीरिक ताकत ही नहीं, बल्कि तेज प्रतिक्रिया, मानसिक एकाग्रता, आत्मसंयम और लगातार अभ्यास की जरूरत होती है। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में अलग-अलग इलाकों से आए अनुभवी खिलाड़ियों के बीच स्वर्ण पदक हासिल करना इस बात की गवाही देता है कि दानिश ने इन तमाम पहलुओं पर मेहनत की है।

कश्मीर में खेलों को लेकर पिछले कुछ वर्षों में नौजवानों की दिलचस्पी लगातार बढ़ी है। मैदानों और प्रशिक्षण केंद्रों में नई पीढ़ी के खिलाड़ी अपने हुनर को निखारने में जुटे हैं। ऐसे में राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कश्मीर के खिलाड़ियों की मौजूदगी और कामयाबी घाटी के उभरते खेल परिदृश्य को भी सामने लाती है।

दानिश रमज़ान की यह जीत बरामूला के उन नौजवानों के लिए भी हौसले का पैगाम है, जो मुकाबला आधारित खेलों में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। उनकी कामयाबी यह दिखाती है कि सीमित स्थानीय संसाधनों से निकलकर भी अगर खिलाड़ी मेहनत, अनुशासन और लगातार अभ्यास को अपना साथी बनाए तो राष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का रास्ता बनाया जा सकता है।

स्थानीय लोगों ने उम्मीद जताई कि दानिश आने वाले मुकाबलों में भी अपनी मेहनत जारी रखेंगे और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बड़ी कामयाबियां हासिल कर कश्मीर का नाम रोशन करेंगे। उनके स्वर्ण पदक ने एक बार फिर यह साबित किया है कि बरामूला और कश्मीर की मिट्टी में मुकाबला करने वाले हुनरमंद नौजवानों की कोई कमी नहीं है।

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