कुंदियन से केरन तक गूंजा ‘रन फॉर फन’, सेना और जिला प्रशासन ने कराया आयोजन


सीमावर्ती इलाके केरन में पर्यटन, सामुदायिक सहभागिता और खेल भावना को बढ़ावा देने के मकसद से भारतीय सेना और जिला प्रशासन कुपवाड़ा की ओर से कुंदियन से केरन तक ‘रन फॉर फन’ का आयोजन किया गया। यह दौड़ ‘केरन मेला 2026’ के बैनर तले कराई गई, जिसमें इलाके को खेल और पर्यटन की गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश नजर आई।

कुंदियन से केरन तक आयोजित इस दौड़ ने सीमावर्ती क्षेत्र की उस सड़क को एक अलग पहचान देने का काम किया, जो आम तौर पर आवाजाही और दूसरे प्रशासनिक व लॉजिस्टिक इस्तेमाल के लिए जानी जाती है। आयोजन के दौरान यही मार्ग सामुदायिक खेल गतिविधि का हिस्सा बना और प्रतिभागियों ने दौड़ के जरिए केरन की खूबसूरत वादियों और सीमावर्ती माहौल के बीच खेल भावना का इजहार किया।

‘केरन मेला 2026’ के तहत आयोजित इस गतिविधि का एक अहम पहलू यह रहा कि इसमें खेल को इलाके की सामाजिक और पर्यटन गतिविधियों के साथ जोड़ा गया। केरन पिछले कुछ अरसे से जम्मू-कश्मीर में उभरते पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बना रहा है। नियंत्रण रेखा के करीब स्थित यह इलाका अपनी प्राकृतिक खूबसूरती, पहाड़ी नजारों और शांत वातावरण के लिए लोगों की दिलचस्पी का केंद्र बना हुआ है। ऐसे में दौड़ जैसे सामुदायिक आयोजनों से इलाके की पहचान को खेल और सकारात्मक गतिविधियों के साथ जोड़ने का अवसर मिलता है।

कुंदियन से केरन तक का मार्ग केवल एक सड़क नहीं, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्र में लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही और संपर्क का अहम जरिया भी है। ‘रन फॉर फन’ के दौरान इसी मार्ग पर प्रतिभागियों की मौजूदगी ने इसे एक सामुदायिक रेस ट्रैक का रूप दिया। इससे यह संदेश भी सामने आया कि सीमावर्ती इलाके केवल सुरक्षा और प्रशासनिक गतिविधियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वहां खेल, पर्यटन और सामाजिक मेलजोल के लिए भी जगह बनाई जा सकती है।

भारतीय सेना और जिला प्रशासन कुपवाड़ा की संयुक्त पहल से आयोजित इस कार्यक्रम ने स्थानीय स्तर पर सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने का अवसर दिया। ‘केरन मेला 2026’ जैसे आयोजनों के जरिए इलाके की प्राकृतिक और सामाजिक खूबियों को व्यापक पहचान देने की कोशिश की जा रही है। खेल गतिविधियां इस प्रयास में एक ऐसा माध्यम बन सकती हैं, जो स्थानीय युवाओं और आम लोगों को सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करती हैं।

इस ‘रन फॉर फन’ की खासियत इसका प्रतिस्पर्धात्मक परिणाम से ज्यादा सामुदायिक स्वरूप रहा। उपलब्ध जानकारी में दौड़ की दूरी या किसी विजेता का विवरण नहीं दिया गया है। लिहाजा आयोजन का मुख्य फोकस भागीदारी, खेल भावना और केरन क्षेत्र को एक जीवंत पर्यटन एवं सामुदायिक गंतव्य के रूप में सामने लाना रहा।

केरन की वादियों में आयोजित यह दौड़ इस बात की मिसाल बनी कि खेल और पर्यटन को एक साथ जोड़कर सीमावर्ती क्षेत्रों में नई गतिविधियों के लिए रास्ता बनाया जा सकता है। ‘केरन मेला 2026’ के तहत कुंदियन से केरन तक हुई यह पहल स्थानीय लोगों और आगंतुकों के लिए इलाके को एक नए अंदाज में देखने का अवसर लेकर आई।

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