इस आयोजन में पद्मश्री सम्मान से नवाज़े जा चुके फैसल अली डार ने भी भारतीय सेना के साथ मिलकर युवाओं की हौसला-अफ़ज़ाई की। उनका जुड़ाव इस बात को रेखांकित करता है कि दूरदराज़ इलाकों में रहने वाले बच्चों को अगर सही रहनुमाई, प्रशिक्षण और मंच मिले तो वे भी खेल के मैदान में अपनी अलग पहचान कायम कर सकते हैं।
तुलैल और गुरेज घाटी का भौगोलिक इलाका अपनी खूबसूरती के साथ-साथ दुश्वारियों के लिए भी जाना जाता है। ऐसे इलाकों में रहने वाले बच्चों तक खेलों की सुविधाएं और प्रशिक्षण पहुंचाना अपने आप में अहम पहल है। खेल महोत्सव के जरिए विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला और उनके भीतर मुकाबले की भावना, अनुशासन तथा टीम भावना को मजबूत करने की कोशिश की गई।
वुशू और रग्बी में विद्यार्थियों की भागीदारी ने आयोजन को खास बनाया। दोनों खेलों में शारीरिक चुस्ती, आत्मविश्वास, अनुशासन और लगातार मेहनत की जरूरत होती है। कम उम्र के खिलाड़ियों ने इन खेलों में हिस्सा लेकर न सिर्फ अपनी खेल क्षमता का इज़हार किया बल्कि यह भी दिखाया कि गुरेज के पहाड़ी इलाकों में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है।
भारतीय सेना की ओर से आयोजित इस पहल का मकसद केवल एक खेल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कम उम्र में प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें तराशने की दिशा में भी इसे एक कदम के तौर पर देखा जा रहा है। ग्रामीण और सीमावर्ती इलाकों के बच्चों को खेलों से जोड़ना उन्हें स्वस्थ जीवनशैली, अनुशासन और सकारात्मक गतिविधियों की तरफ ले जाने में मददगार हो सकता है।
स्थानीय स्तर पर ऐसे आयोजन बच्चों को अपनी काबिलियत आजमाने का मंच देते हैं। खासकर उन इलाकों में जहां बड़े खेल मैदान, प्रशिक्षक और नियमित खेल प्रतियोगिताएं आसानी से उपलब्ध नहीं होतीं, वहां इस तरह की गतिविधियां नौजवानों के लिए नई राह खोल सकती हैं।
तुलैल खेल महोत्सव 2026 ने एक बार फिर यह पैगाम दिया कि कश्मीर के दूरदराज़ पहाड़ी इलाकों में भी खेलों को लेकर नई नस्ल के अंदर गहरा जोश मौजूद है। जरूरत इस बात की है कि इन प्रतिभाओं को लगातार प्रशिक्षण, बेहतर सुविधाएं और आगे बढ़ने के पर्याप्त मौके मिलते रहें। 103 छात्रों की भागीदारी इसी उम्मीद की एक तस्वीर पेश करती है कि गुरेज और तुलैल की वादियों से आने वाले दिनों में कई नए खिलाड़ी सामने आ सकते हैं।
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