एलओसी के करीब तालीम की नई रौशनी, आर्मी गुडविल स्कूलों से संवर रहा बच्चों का मुस्तकबिल


जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के दूरदराज तथा सरहदी इलाकों में जहां जिंदगी अक्सर मुश्किल हालात और सीमित सहूलियतों के बीच आगे बढ़ती है, वहीं तालीम की रोशनी बच्चों के मुस्तकबिल को नई राह दिखा रही है। 9 सितंबर 2026 को प्रकाशित लेख “एलओसी के किनारे उम्मीद के स्कूल” में ऑपरेशन सद्भावना के तहत चलाए जा रहे शिक्षा और हुनर विकास के प्रयासों को सामने लाया गया है। लेख में आर्मी गुडविल स्कूलों को सरहद की निगहबानी से आगे समाज के साथ जुड़कर काम करने वाली एक ऐसी पहल के तौर पर पेश किया गया है, जिसने एलओसी के करीब रहने वाले बच्चों के लिए पढ़ाई और तकनीकी हुनर हासिल करने के रास्ते आसान किए हैं।

ऑपरेशन सद्भावना के तहत स्थापित आर्मी गुडविल स्कूलों का मकसद उन इलाकों में बच्चों को बेहतर तालीमी माहौल उपलब्ध कराना है, जहां भौगोलिक परिस्थितियों और दूरदराज की बस्तियों की वजह से शिक्षा के अवसर हमेशा आसान नहीं रहे हैं। इन स्कूलों में बच्चों को बुनियादी और आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ उनके हुनर को निखारने पर भी तवज्जो दी जा रही है। इस पहल की खासियत यह है कि सरहदी बेल्ट के बच्चों को अपने ही इलाकों में ऐसी तालीमी सहूलियतें मिल रही हैं, जो उन्हें आगे की पढ़ाई, रोज़गार और हुनरमंद जिंदगी के लिए तैयार कर सकती हैं।

आर्मी गुडविल स्कूलों का दायरा सिर्फ किताबों और कक्षा तक महदूद नहीं है। बदलते दौर की जरूरतों को देखते हुए कई स्कूलों में स्मार्ट क्लास, करियर काउंसलिंग, शिक्षक प्रशिक्षण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स जैसी आधुनिक गतिविधियों को भी तालीम का हिस्सा बनाया जा रहा है। इससे सरहदी इलाकों के बच्चों को तकनीकी दुनिया से जुड़ने और अपनी काबिलियत को नए मैदानों में आजमाने का मौका मिल रहा है। खास तौर पर ऐसे बच्चे, जो दूरदराज के गांवों और एलओसी से सटे इलाकों में रहते हैं, उनके लिए यह तालीमी तंत्र आगे बढ़ने की एक अहम सीढ़ी साबित हो सकता है।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में आर्मी गुडविल स्कूलों का नेटवर्क पिछले दो दशकों से ज्यादा समय से काम कर रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इस नेटवर्क में कुल 43 स्कूल शामिल हैं, जिनमें 28 कश्मीर डिवीजन, 8 जम्मू और 7 लद्दाख में हैं। इन संस्थानों में करीब 17 हजार विद्यार्थी तालीम हासिल कर रहे हैं और छात्राओं की हिस्सेदारी लगभग 43 प्रतिशत है। यह आंकड़ा बताता है कि सरहदी इलाकों में बेटियों की तालीम को भी इस पहल में अहम जगह मिल रही है। शिक्षा का यह विस्तार न सिर्फ बच्चों के व्यक्तिगत मुस्तकबिल के लिए अहम है, बल्कि इन इलाकों में सामाजिक और आर्थिक बदलाव की बुनियाद को भी मजबूत करता है।

एलओसी के करीब स्कूलों का यह तालीमी सफर इस मायने में भी अहम है कि यह सरहदी इलाकों में आम जिंदगी के लगातार मजबूत होने की तस्वीर पेश करता है। जिन इलाकों को अक्सर सिर्फ सरहद, सुरक्षा और मुश्किल हालात के नजरिए से देखा जाता है, वहां स्कूलों में बच्चों की मौजूदगी, किताबों की आवाज और हुनर सीखने की गतिविधियां एक अलग तस्वीर सामने लाती हैं। आर्मी गुडविल स्कूल इस सोच को मजबूती देते हैं कि सरहदी बस्तियों के बच्चों का मुस्तकबिल भी उतना ही अहम है और उन्हें भी बेहतर तालीम तथा आधुनिक हुनर के पूरे मौके मिलने चाहिए।

“एलओसी के किनारे उम्मीद के स्कूल” में उजागर की गई यह पहल इस बात की तरफ इशारा करती है कि ऑपरेशन सद्भावना के जरिए तालीम को समाजी जुड़ाव का अहम जरिया बनाया गया है। सरहदी इलाकों में बच्चों को पढ़ाई, तकनीकी ज्ञान और करियर की राह से जोड़ना आने वाले वर्षों में इन समुदायों के लिए दूरगामी फायदे लेकर आ सकता है। किताब से लेकर तकनीक तक और कक्षा से लेकर करियर तक, आर्मी गुडविल स्कूलों के जरिए बच्चों को आगे बढ़ने के जो मौके मिल रहे हैं, वे एलओसी के करीब बसे इलाकों में उम्मीद की एक नई रौशनी कायम कर रहे हैं।

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