वादी के नौजवानों के नाम समर्पित कामयाबी, डॉ. मुश्ताक ने पूरी की 72 किमी अल्ट्रा दौड़


कश्मीर के कुलगाम जिले के कुटाब्राडी गांव से ताल्लुक रखने वाले डॉक्टर मुश्ताक अहमद मल्ला ने अपनी मेहनत, जज़्बे और बुलंद हौसले का शानदार मुज़ाहिरा करते हुए 72 किलोमीटर लंबी खारदुंग ला चुनौती पूरी कर वादी का नाम रोशन किया है। 13वीं लद्दाख मैराथन के तहत आयोजित इस बेहद मुश्किल दौड़ को डॉ. मुश्ताक ने 11 घंटे 20 मिनट 9 सेकंड में पूरा किया। समुद्र तल से करीब 17,618 फीट की ऊंचाई तक पहुंचकर इतनी लंबी दूरी तय करना उनकी शारीरिक क्षमता और असाधारण सहनशक्ति को दर्शाता है। रिपोर्टों के मुताबिक, वह इस चुनौती को पूरा करने वाले कश्मीर घाटी के पहले एथलीट बताए जा रहे हैं।

खारदुंग ला चुनौती को ऊंचाई और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण लंबी दूरी की दौड़ों में बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। यहां धावकों को सिर्फ लंबी दूरी ही नहीं, बल्कि ऊंचाई, कम ऑक्सीजन और बदलते मौसम जैसी परिस्थितियों का भी सामना करना पड़ता है। ऐसे माहौल में 72 किलोमीटर की दौड़ पूरी करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। डॉ. मुश्ताक ने इस चुनौती को पूरा कर यह साबित किया कि लगातार तैयारी, अनुशासन और मजबूत इरादे के साथ मुश्किल से मुश्किल मंजिल भी हासिल की जा सकती है। उनकी कामयाबी ने कुलगाम के साथ-साथ पूरी वादी में खेल और फिटनेस को लेकर एक सकारात्मक पैगाम पहुंचाया है।

डॉ. मुश्ताक की इस उपलब्धि की खास बात यह भी है कि उन्होंने अपनी दौड़ को कश्मीरी नौजवानों और फिटनेस के नाम समर्पित किया। उनका यह समर्पण वादी के युवाओं के लिए खास मायने रखता है। आज कश्मीर में नई पीढ़ी पढ़ाई और रोजगार के साथ-साथ खेल, फिटनेस, पर्वतीय गतिविधियों और सहनशक्ति वाले खेलों में भी अपनी जगह बना रही है। डॉ. मुश्ताक की उपलब्धि इसी बदलती सोच की एक प्रेरक तस्वीर पेश करती है। खारदुंग ला की ऊंचाइयों पर उनकी दौड़ यह पैगाम देती है कि कश्मीर का नौजवान अगर अपने हुनर और ताकत को सही दिशा दे, तो वह देश के किसी भी हिस्से में अपनी काबिलियत का लोहा मनवा सकता है।

एक डॉक्टर के रूप में पेशेवर जिम्मेदारियों के साथ इतनी कठिन धीरज-दौड़ को पूरा करना भी उनके अनुशासन और प्रतिबद्धता को सामने लाता है। चिकित्सा पेशा अपने आप में समय और जिम्मेदारी की मांग करता है, लेकिन इसके साथ फिटनेस और लंबी दूरी की दौड़ के लिए तैयारी करना उनकी लगन को जाहिर करता है। उनकी यह कामयाबी उन युवाओं के लिए भी हौसला-अफजाई का सबब बन सकती है, जो अपने रोजमर्रा के जीवन में फिटनेस और खेल को शामिल करना चाहते हैं। इससे यह सोच भी मजबूत होती है कि खेल सिर्फ मुकाबले में जीत हासिल करने का जरिया नहीं, बल्कि बेहतर सेहत, आत्मविश्वास और अनुशासन का माध्यम भी है।

कश्मीर के लिए ऐसी उपलब्धियां इसलिए भी अहम हैं क्योंकि वादी के नौजवानों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत सिर्फ इस प्रतिभा को सही मंच, मार्गदर्शन और लगातार मेहनत के साथ आगे बढ़ाने की है। डॉ. मुश्ताक का सफर इस बात की मिसाल बन सकता है कि किसी छोटे गांव से निकलकर भी इंसान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की मुश्किल चुनौतियों तक पहुंच सकता है। कुटाब्राडी से खारदुंग ला तक का यह सफर सिर्फ 72 किलोमीटर की दूरी नहीं, बल्कि हौसले, तैयारी और आत्मविश्वास की कहानी है।

डॉ. मुश्ताक अहमद मल्ला की यह कामयाबी वादी के नौजवानों के लिए एक उम्मीद और प्रेरणा लेकर आई है। खारदुंग ला की बुलंदियों पर लहराता उनका जज़्बा यह बताता है कि मंजिल चाहे कितनी भी दूर और रास्ता कितना ही दुश्वार क्यों न हो, मजबूत इरादे और लगातार मेहनत से उसे हासिल किया जा सकता है। उनकी यह उपलब्धि कश्मीर में फिटनेस, खेल संस्कृति और सकारात्मक युवा ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक यादगार मिसाल बनकर सामने आई है।

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